
उज्जैन, प्रतिवर्ष परंपरा के अनुसार विजयादशमी पर्व (दशहरा) बड़े उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सायं 4 बजे भगवान श्री महाकाल की सवारी राजसी ठाट-बाट के साथ निकाली गई। सवारी के पूर्व सभा मंडप में भगवान श्री मनमहेश जी का पूजन कर पालकी को रवाना किया गया।
मुख्य द्वार पर पहुँचने पर मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवानों एवं श्री महाकालेश्वर बैण्ड द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री मनमहेश को सलामी दी। मार्ग में दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन लाभ प्राप्त किए। घुड़सवार दल सवारी में शामिल हुआ।
वर्ष में एक बार नए शहर में भ्रमण हेतु निकलने वाली यह सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुंडा चौराहा, टॉवर मार्ग, शहीद पार्क, घास मंडी चौराहा, माधवनगर हॉस्पिटल, पुलिस कंट्रोल रूम, एल.आई.सी. ऑफिस होते हुए लिनन रेमंड शोरूम के समीप की गली से दशहरा मैदान पहुंची।
दशहरा मैदान पर भगवान की पालकी का स्वागत एवं पूजन कलेक्टर एवं अध्यक्ष श्री रोशन कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा द्वारा किया गया एवं भगवान श्री मनमहेश जी तथा शमी वृक्ष का पूजन परंपरानुसार सम्पन्न किया गया
चामुंडा माता चौराहा पर माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के परिवारजनों द्वारा पुष्पवर्षा कर भगवान श्री मनमहेश का स्वागत किया गया।
सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा, रंगोली सजावट एवं स्वागत द्वारों से भगवान की पालकी का अभिनंदन किया गया।
*सवारी की वापसी यात्रा*
पूजन उपरांत पालकी दशहरा मैदान से रवाना होकर श्री गंगा होटल मार्ग, देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड, धन्नालाल की चाल, लोक निर्माण विभाग कार्यालय, फ्रीगंज ओवरब्रिज, संख्याराजे धर्मशाला, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा, इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ब्रिज, बेगमबाग एवं कोट मोहल्ला होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुँची जहाँ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ सवारी का समापन हुआ।
सवारी में कलेक्टर एवं अध्यक्ष श्री महाकालेश्वर मंदिर श्री रोशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, प्रशासक एवं अपर कलेक्टर श्री प्रथम कौशिक, नगर पालिका निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री श्रेयांस कुमट, उप प्रशासक श्रीमती सिम्मी यादव, हिमांशु कारपेंटर, श्री मूलचंद जूनवाल सहित मंदिर के पुजारी-पुजारीजन, नगर के गणमान्यजन, भारत स्काउट-गाइड दल, कांग्रेस सेवा दल एवं सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ियाँ सम्मिलित हुईं।
मंदिर गर्भगृह में श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री होल्कर मुखारविंद के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
*माननीय मुख्यमंत्री महोदय की मंशा अनुसार दशहरा पर्व पर पहली बार भगवान श्री महाकालेश्वर जी की निकलने वाली सवारी में सांस्कृतिक एवं आलौकिक छटा देखने को मिली*
*पहली बार राज्य के विभिन्न जनजातीय दलों के कलाकारों ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा*
भगवान श्री महाकालेश्वर की विजयादशमी पर्व पर निकले वाली सवारी में मध्यप्रदेश के की समृद्ध लोक संस्कृति एवं जनजातीय परंपराओं का भव्य संगम देखने को मिला। राज्य के विभिन्न अंचलों से आए जनजातीय दलों के लगभग 250 कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी पारंपरिक कला एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति अपनी विशिष्ट जीवनशैली, प्रकृति प्रेम, लोकगीतों एवं ओजस्वी नृत्यों के लिए विशिष्ट पहचान रखती है। बाबा महाकाल की सवारी के अवसर पर इन पारंपरिक लोक कलाओं ने सवारी मार्ग को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया और श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर राज्य के रतलाम, धार, देवास एवं झाबुआ जिले से आए जनजातीय दलों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।
*भगवान श्री महाकाल की सवारी में दशहरा मैदान पर वैदिक बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रों से उद्घोष किया गया*
भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी में दशहरा मैदान पर 300 वैदिक बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रो से उद्घोष किया गया।
*1,00,000 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में विशाल एवं आकर्षक रंगोली*
सम्पुर्ण सवारी मार्ग पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के निर्देशन में सवारी मार्ग पर कुंज बिहारी पांडे एवं उनके दल द्वारा 1 लाख वर्गफीट क्षेत्र में भव्य रंगोलियों का निर्माण किया गया ।भगवान महाकाल की दिव्यता तथा भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आकर्षक कलात्मक स्वरूप में प्रदर्शित किया गया । श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा चलित रथों के माध्यम से भक्तों ने दर्शन किये
दशहरा पर्व पर पहली बार भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिये श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति द्वारा चलित रथ की व्यवस्था की गई है। सवारी मार्ग पर 05 एल.ई.डी. रथों पर सवारी का प्रसारण किया गया जिससे श्रद्धालु ने भगवान के दर्शन लाभ लिया।
*भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी में 500 किलोग्राम से अधिक पुष्पों की ड्रोन से भव्य पुष्पवर्षा*
दशहरे पर्व पर निकलने वाली भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी में भगवान की पालकी पर ड्रोन के माध्यम से भव्य एवं आकर्षक पुष्पवर्षा की गई। सवारी मार्ग के प्रमुख स्थानों पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक एवं मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस दौरान 500 किलोग्राम से अधिक पुष्पों की वर्षा की गई, जिससे सवारी की भव्यता और दिव्यता और अधिक निखरकर सामने आई।
*सवारी में 84 महादेव की झांकी निकाली गई*
दशहरा पर्व पर भगवान श्री महाकालेश्वर जी की निकले वाली सवारी में उज्जैन की प्राचीन शिव उपासना एवं आध्यात्मिक परंपरा को प्रदर्शित करते हुए 84 महादेव की झांकी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। उज्जैन के 84 महादेव स्वरूपों की धार्मिक महत्ता और भगवान शिव से जुड़ी नगर की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को कलात्मक एवं सांस्कृतिक रूप में जीवंत किया गया। सवारी मार्ग पर 84 महादेव के स्वरूपों एवं उनसे जुड़े धार्मिक भावों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया तथा श्रद्धालुओं को उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपरा से जुड़ने का विशेष अनुभव प्रदान किया।
*विजयादशमी महापर्व एवं धार्मिक विषयों पर की गई लाइव पेंटिंग*
सवारी में सम्मिलित कलाकारों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर जी, भगवान श्री रामचंद्र जी, भगवान श्री हनुमान जी, एवं सम्राट विक्रमादित्य जी आदि विभिन्न लाइव पेंटिंग की गई भगवान की सवारी में 10 भजन मण्डलियां सम्मिलित की गई।
सवारी में रजत ढोल का वादन, श्री महाकालेश्वर बैण्ड, तोपची कडाबीन, भारत स्काउट गाइड, कांग्रेस सेवा दल, मार्ग उद्घोषक आदि सम्मिलित हुए। साथ ही, मार्ग पर सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश, आपातकालीन चिकित्सा तथा फायर ब्रिगेड सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ संबंधित विभागों द्वारा की गई।
सवारी उपरांत मंदिर गर्भगृह में संध्या पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री होल्कर (मुखारविंद) स्वरूप के दर्शन हुए। इस अवसर पर परंपरानुसार भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराये गये साथ ही मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन भी किया गया।
