
सीधी। जिले के मड़वास और सेमरिया गढ़ी में दशहरा मिलन का आयोजन हुआ। मड़वास एवं सेमरिया गढ़ी में आज भी परम्परागत तरीके से दशहरा मिलन की धूम रही। आयोजन से सांस्कृतिक पुरानी धरोहर और मर्यादाएं सहेजी गई। मड़वास गढ़ी और सेमरिया गढ़ी में हर साल की भांति इस वर्ष भी विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक उत्सव का शानदार आयोजन किया गया , जहां इतिहास और लोक-आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला । विजयादशमी के दिन गढ़ी में राजा अभ्युदय सिंह का पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से तिलक लगाकर पूजन व सम्मान किया गया । इस दौरान राजसी हथियारों की पारंपरिक शस्त्र पूजा भी वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुई । पूर्व रियासत के अंतर्गत आने वाले दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग आज भी अपने राजा के दर्शन करने और उन्हें बधाई देने गढ़ी पहुंचे । उत्सव के दौरान लोग एक-दूसरे को दशहरा की बधाई देते हुए पारम्परिक रूप से पान खिला कर त्यौहार की खुशियां जाहिर की । मान्यता के अनुसार इस दिन राजा और नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना बेहद शुभ और समृद्धि दायक माना जाता है।
मड़वास की ही तरह सेमरिया गढ़ी में भी यह सदियों पुरानी विरासत आज भी बदस्तूर जारी है। आधुनिक युग में भी यहां के राजवंश और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर अपनी पुरानी धरोहर और मर्यादाओं को सहेज कर रखा है। सेमरिया गढ़ी के राव कृष्ण कुमार सिंह भंवर (के.के.सिंह) ने दशहरा मिलन के दौरान लोगों से मिलकर त्यौहार की बधाई देते हुए खुशियों को साझा किया। यह आयोजन केवल राजपरिवार तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र के लिए आपसी भाईचारे और मिलन का प्रतीक दिखा। सैकड़ो की संख्या में पहुंचकर लोगों ने गढ़ी में आयोजित दशहरा मिलन उत्सव में शिरकत किया ।
