कभी जेब में थे उधारी के 1100 रुपये, आंखों में था सिंगर बनने का सपना, फिर ऐसे चमकी कुमार सानू की किस्मत

Kumar Sanu Birthday: मुंबई, 1100 रुपये उधार लेकर मुंबई पहुंचे कुमार सानू ने अपनी अनूठी आवाज और कड़ी मेहनत से 90 के दशक के म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज किया और इतिहास रच दिया।

मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में हर रोज़ लाखों लोग अपनी किस्मत आजमाने आते हैं। कुछ लोग सपनों के इस शहर में गुम हो जाते हैं, तो कुछ अपनी मेहनत के दम पर एक पहचान बन जाते हैं। 90 के दशक में अपनी जादुई आवाज से हर दिल पर राज करने वाले फेमस प्लेबैक सिंगर कुमार सानू की कहानी भी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक है।

एक दौर था जब उनके पास जेब में ज्यादा पैसे नहीं थे और उन्होंने सिर्फ 1100 रुपये उधार लेकर सपनों के शहर में कदम रखा था। आज उनकी गिनती देश के सबसे सफल और पॉपुलर कलाकारों में होती है।

जब उधारी के पैसों से शुरू हुआ करियर
कोलकाता की गलियों से निकलकर सपनों की मायानगरी मुंबई का रुख करना किसी भी युवा के लिए आम बात नहीं होती। म्यूजिक उनके खून में जरूर था क्योंकि उनके पिता खुद एक जाने-माने संगीतकार थे। बचपन से ही घर में रियाज और सुरों का माहौल मिला, जिससे उनकी नींव मजबूत होती चली गई।

शुरुआत में कुमार सानू ने पूजा पंडालों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा और खूब वाहवाही बटोरी। लेकिन जब उन्होंने मुंबई आने का फैसला किया, तो रास्ते में कई बड़ी मुश्किलें उनका इंतजार कर रही थीं। शुरुआत के दिनों में उन्हें पैसों की कमी का सामना करना पड़ा और उन्होंने दोस्तों से 1100 रुपये उधार लेकर अपने करियर की शुरुआत की थी।

किस्मत के दरवाजे खुले और चमक गया सितारा
मुंबई आने के बाद संघर्ष का दौर लंबा चला और हर कदम पर खुद को साबित करना बड़ा मुश्किल था। आखिरकार साल 1989 में आई फिल्म जादूगर ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया और कुमार सानू को बड़ा ब्रेक मिल गया। इसके बाद आया 90 का दशक, जिसे भारतीय संगीत इतिहास में उनका स्वर्ण काल कहा जाता है।

फिल्म आशिकी के गानों ने रातोंरात उन्हें देश का सबसे चहेता स्टार बना दिया। इसके बाद आमिर खान की फिल्म दिल है कि मानता नहीं, सलमान खान और संजय दत्त स्टारर साजन और शाहरुख खान की बाजीगर जैसी फिल्मों के गानों की सफलता ने उन्हें बुलंदी पर पहुंचा दिया। उनकी आवाज का जादू कुछ ऐसा था कि हर संगीतकार अपनी फिल्म में उनकी मौजूदगी पक्की करना चाहता था।

1 दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का अनोखा रिकॉर्ड
अपने करियर के चरम पर कुमार सानू की व्यस्तता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे 1 दिन में 20 से 25 गाने तक रिकॉर्ड कर लेते थे। इसके पीछे एक बड़ी वजह उनके विदेश दौरों के कमिटमेंट्स भी थे। कुमार सानू नहीं चाहते थे कि उनके बाहर रहने की वजह से किसी निर्देशक या फिल्म का काम रुके।

यही वजह थी कि वे दिन-रात एक करके पूरी शिद्दत के साथ काम करते थे। उनकी यह लगन और अनुशासन ही था जिसने उन्हें केवल एक पॉपुलर सिंगर नहीं, बल्कि एक पेशेवर मिसाल बना दिया। वे आज भी मानते हैं कि म्यूजिक वही असर छोड़ता है जो सीधे दिल से निकलता है।

मॉर्डन दौर में भी कायम है सादगी
आज के आधुनिक दौर में म्यूजिक बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल चुकी है और टेक्नोलॉजी ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया है। हालांकि कुमार सानू का मानना है कि आज की तकनीक ने भले ही काम हल्का कर दिया हो, लेकिन उस दौर के गानों की रूह और जीवंतता को पाना आज थोड़ा मुश्किल होता है।

वे नई पीढ़ी के कलाकारों के टेलेंट का भी पूरा सम्मान करते हैं और मानते हैं कि हर दौर में टैलेंट अपनी जगह बना ही लेता है। सादगी से भरा उनका जीवन और संगीत के प्रति उनका अटूट समर्पण आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी सीख है।

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