मुंबई, 19 अक्टूबर (वार्ता) सोनी सब के कलाकार गुलकी जोशी, टोरल रसपुत्रा, जितेन लालवानी, मुकुल हरीश और अक्षया हिंदलकर ने दशहरा के अवसर पर अपनी पारिवारिक परंपराओं, बचपन की यादों और त्योहार से जुड़ी खास रस्मों को साझा किया।बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा देशभर में अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर परिवार के साथ पूजा-अर्चना, विशेष पकवान और अपनों के साथ बिताए गए पल त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देते हैं। सोनी सब के धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती की भूमिका निभा रहीं टोरल रसपुत्रा ने बताया कि दशहरा पर घर में छोटी-सी पूजा करना और बड़ों का आशीर्वाद लेना उनकी खास परंपरा है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार उन्हें अपनी जड़ों और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने की याद दिलाता है। उनके अनुसार, बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश सही कार्य करने के लिए साहस और दृढ़ विश्वास के महत्व को दर्शाता है।
इसी धारावाहिक में द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी ने कानपुर में बिताए अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि नवीन मार्केट में होने वाला भव्य रावण दहन उनके लिए दशहरा का सबसे यादगार अनुभव रहा है। उनके चाचा की वहां दुकान थी और परिवार के लोग उनकी इमारत की छत से आतिशबाजी तथा रावण दहन का नजारा देखते थे। उन्होंने कहा कि मुंबई में त्योहार मनाने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन बचपन की यादें आज भी उनके दिल में बसी हैं।
‘यादें’ में डॉ. सृष्टि की भूमिका निभा रहीं गुलकी जोशी ने कहा कि दशहरा उनके लिए परिवार के साथ समय बिताने और छोटी-छोटी खुशियों को संजोने का अवसर है। पूजा के बाद पूरे परिवार का एक साथ बैठकर भोजन करना उनकी पसंदीदा परंपराओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे पल परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और त्योहार को यादगार बनाते हैं। दशहरा नकारात्मकता को पीछे छोड़कर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में टाइगर की भूमिका निभा रहे मुकुल हरीश ने बताया कि उनके लिए दशहरा परंपराओं, पारिवारिक मेल-मिलाप और स्वादिष्ट व्यंजनों का संगम है। वह इस दिन फाफड़ा-जलेबी के साथ उत्सव की शुरुआत करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, परिवार में वाहनों की पूजा करने की भी परंपरा है, जिसमें आने वाले वर्ष के लिए सुरक्षा, समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि दशहरा का संदेश है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, अंततः अच्छाई की जीत होती है।
इसी धारावाहिक में राशि की भूमिका निभा रहीं अक्षया हिंदलकर ने मराठी परिवार की अपनी विशेष परंपरा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आपटा के पत्तों को सोने का प्रतीक मानकर एक-दूसरे को देना और ‘सोना घ्या, सोन्यासारखे रहा!’ कहकर शुभकामनाएं देना उन्हें बेहद पसंद है। यह परंपरा लोगों को आपस में जोड़ती है। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ त्योहार के पकवानों का आनंद लेना भी उत्सव का अहम हिस्सा है। व्यस्त जीवन में आगे बढ़ने के साथ ही परिवार के साथ बिताए गए ऐसे पलों और उनसे जुड़ी यादों का महत्व और बढ़ जाता है। सोनी सब के इन कलाकारों ने कहा कि दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों, सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन में अच्छाई को अपनाने का अवसर भी है।

