कोलकाता, कोलकाता के प्रसिद्ध चोरबागान सर्बोजनिन पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम को अत्यधिक भीड़ के कारण मची भीषण भगदड़ में 19 लोगों की दर्दनाक मौत और 25 अन्य के घायल होने के मामले में पुलिस प्रशासन पर आखिरकार गाज गिर गई है। इस दुखद दुर्घटना के बाद बढ़ते जनआक्रोश और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बीच रविवार को गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (OC) सुमित कुमार घोष को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट के अनुभवी अधिकारी हीरक दलपति को इस थाने का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है, जिन्हें तत्काल प्रभाव से अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए थे।
भीड़ प्रबंधन के लिए नौ अनुभवी आईपीएस अधिकारी तैनात, लालबाजार मुख्यालय ने सभी थानों के लिए जारी किए 11 सख्त निर्देश
चोरबागान हादसे के बाद कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) त्योहारों के बाकी दिनों में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। शहर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नौ अनुभवी आईपीएस अधिकारियों को तुरंत मैदान में उतारा गया है। साथ ही, लालबाजार की ओर से शहर के सभी पुलिस स्टेशनों को 11 सूत्रीय सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। नए आदेशों के तहत बारिश शुरू होते ही पंडालों के प्रवेश द्वार बंद करने, अंदर भीड़ न जुटने देने, वीआईपी गाड़ियों को दूर पार्क करने और खराब मौसम में भी पुलिसकर्मियों को अपनी तय ड्यूटी पर मुस्तैद रहने का कड़ा आदेश दिया गया है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने संभाली स्थिति की कमान, लापरवाही के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच के दिए गए हैं निर्देश
इस भयानक हादसे के बाद मुख्यमंत्री और पुलिस मामलों के प्रभारी मंत्रियों ने साल्ट लेक स्थित ‘आरक्षा भवन’ और लालबाजार कंट्रोल रूम का दौरा कर पूरे हालात की समीक्षा की। हालांकि शुरुआती बयानों में पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी की सराहना की गई है, लेकिन भीड़ प्रबंधन और राहत कार्यों में देरी के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों का आरोप था कि यदि समय रहते पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए होते और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंच जाता, तो इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी को टाला जा सकता था।

