सीहोर। नवरात्र पर्व की समापन बेला नजदीक है. दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारियां शुरू हो गई हैं. शहर में टाउन हॉल और सीवन घाट पर विसर्जन स्थलों पर लाइटिंग और सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. पंचायत स्तर पर विसर्जन के लिए सुरक्षा के एक समान नियम और संसाधनों की कमी के चलते लोग अपनी सुविधा के अनुसार नदी, तालाब और खदानों में भरे पानी तक पहुंच जाते हैं. नतीजा यह है कि हर साल प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबने की घटनाएं सामने आती हैं. पिछले दिनों गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जिले में तीन लोगों की मौत ने इन इंतजामों पर सवाल खड़े किए थे.
बीते दिनों गणेश महोत्सव के अंतिम दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जिले में अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की डूबने से मौत हुई थी. अहमदपुर क्षेत्र के सीलखेड़ा में खदान में भरे पानी में प्रतिमा विसर्जन के दौरान 16 वर्षीय बालक की जान चली गई थी. वहीं, पार्वती नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विसर्जन के लिए पहुंचे 21 वर्षीय युवक की भी डूबने से मौत हो गई थी. इससे पहले आष्टा क्षेत्र की पपनास नदी में तीन बच्चे डूब गए थे. इनमें से दो को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि एक बालक की मौत हो गई थी. इन घटनाओं से स्पष्ट है कि गहरे पानी वाले स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से विसर्जन के दौरान जानलेवा हादसों का खतरा बना रहता है.
ग्राम पंचायत बमूलिया में आसपास के गांवों की प्रतिमाओं का विसर्जन गांव के पास स्थित तालाब में कराया जाता है. सरपंच रामस्वरूप विश्वकर्मा के अनुसार, प्रतिमाओं के साथ चौकीदार को भेजा जाता है. वह नौका से विसर्जन कराने और लोगों को पानी में जाने से रोकने सभी प्रतिमाओं के विसर्जन तक मौके पर तैनात रहता है. वहीं एसडीएम तन्मय वर्मा का कहना है कि पंचायतों को सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए जाते हैं. पंचायतें अपने स्तर पर विसर्जन के लिए जरूरी संसाधन जुटाती हैं.
शहर में कुंड, के्रन और नौका, गांवों में इंतजाम शून्य
शहरी क्षेत्रों में प्रतिमा विसर्जन के लिए अस्थायी कुंड और निर्धारित स्थल बनाए जाते हैं. सीहोर में भी विसर्जन स्थलों पर क्रेन और नौका की मदद से प्रतिमाओं को पानी में उतारने की व्यवस्था की जाती है, ताकि लोगों को गहरे पानी में उतरने की जरूरत न पड़े. इसके उलट ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह विसर्जन के लिए न तो निर्धारित स्थल हैं और न ही पर्याप्त रोशनी, नौका या अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध हैं. हालांकि कुछ ग्राम पंचायतें अपने स्तर पर कुछेक इंतजाम करती हैं, लेकिन सभी जगह एक जैसी व्यवस्था नहीं होने से जोखिम बना रहता है. जरूरत है कि पंचायतों को स्पष्ट निर्देश देकर सुरक्षित विसर्जन स्थल तय किए जाएं और वहां जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.
पहले मिलते थे निर्देश, अब खुद करना पड़ता इंतजाम
जिले की कुछ ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों के अनुसार, करीब दस साल पहले तक प्रशासन की ओर से विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश मिलते थे. इसके तहत कोटवार, सचिव और जरूरत के अनुसार पुलिसकर्मी तैनात रहते थे. अब पुलिस की तैनाती के लिए पंचायतों को अलग से पत्राचार करना पड़ता है. उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदर्भ या निर्देश नहीं मिलने से व्यवस्था बनाने में परेशानी होती है. ऐसे में विसर्जन स्थलों पर निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम पंचायतों की क्षमता पर निर्भर रह जाते हैं.
पार्वती नदी पर रोशनी और निगरानी की आवश्यकता
चांदबड़ से कालापीपल रोड की ओर पार्वती नदी पर आसपास के क्षेत्रों से लोग प्रतिमा विसर्जन के लिए पहुंचते हैं. यहां पुलिस की तैनाती तो होती है, लेकिन रोशनी सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की कमी बताई जाती है. दो दिनों तक विसर्जन का सिलसिला चलने के कारण अंधेरे में हादसे का खतरा बढ़ जाता है. यहां पर्याप्त लाइटिंग, सुरक्षित पहुंच मार्ग और गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए प्रभावी निगरानी की जरूरत है.
