
बालाघाट, कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में उपचाराधीन एक मादा बाघ शावक की 18 अक्टूबर को मृत्यु हो गई। इस शावक को 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव परियोजना क्षेत्र के ग्राम अरौली से रेस्क्यू किया गया था। आबादी के बीच पहुंचने के दौरान शावक से जुड़ी एक घटना में महिला घायल हो गई थी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने शावक को रेस्क्यू कर उपचार के लिए वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती कराया था।
कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार मादा बाघ शावक अकेली और कमजोर शारीरिक अवस्था में मिली थी। उसकी जान बचाने तथा स्वास्थ्य में सुधार लाने के उद्देश्य से वन्यजीव चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया था। उपचार के दौरान उसे लगातार चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 18 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई।
एनटीसीए की एसओपी के तहत पोस्टमार्टम
मादा बाघ शावक की मृत्यु के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। 18 अक्टूबर को कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी, उप संचालक पशुपालन मंडला तथा पशु चिकित्सक बैहर की संयुक्त टीम ने शव परीक्षण किया। पोस्टमार्टम के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शवदाह किया गया।
जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे नमूने
वन विभाग ने बताया कि शव परीक्षण के दौरान आवश्यक शारीरिक अंगों एवं जैविक नमूनों को फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मादा बाघ शावक की मृत्यु के कारणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई कार्रवाई
शव परीक्षण एवं शवदाह की कार्रवाई के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, हालोन के सहायक संचालक, मुक्की परिक्षेत्र अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि श्री रंजीत सत्रुसल्य, तहसीलदार, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मादा बाघ शावक के शव परीक्षण से लेकर शवदाह तक की संपूर्ण कार्रवाई निर्धारित प्रोटोकॉल एवं प्रचलित प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न की गई। नमूनों की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मृत्यु के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
