छह महीने तक के शिशुओं के आहार में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने की तैयारी

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है।
इसका मकसद शिशु पोषण से जुड़े उत्पादों में कार्बोहाइड्रेट के इस्तेमाल से संबंधित नियमों को और सख्त बनाना है।खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु आहार) नियमावली, 2020 में संशोधन से जुड़ा यह प्रस्ताव 15 अक्टूबर को अधिसूचित किया गया था और 16 अक्टूबर को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित हुआ।
इस मसौदे के जरिये विनियम 3(6) के तहत एक नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके मुताबिक, “छह महीने तक की आयु के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज नहीं मिलाया जाएगा।”
मौजूदा नियमों के तहत शिशुओं के आहार में कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल की अनुमति कुछ शर्तों के साथ है, जिसके तहत कुल कार्बोहाइड्रेट में इनकी संयुक्त सीमा अधिकतम 20 प्रतिशत तक हो सकती है।
प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद छह महीने तक के शिशुओं के आहार में इन दोनों तरह की शर्करा को मिलाने पर पूरी तरह रोक लग जाएगी, जबकि शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े बाकी नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
एफएसएसएआई ने इस राजपत्र अधिसूचना की प्रतियां सार्वजनिक होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर हितधारकों और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। नियामक ने कहा है कि तय सीमा के भीतर मिलने वाले सभी सुझावों और ज्ञापनों पर विचार करने के बाद ही संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु आहार) संशोधन नियमावली, 2026 नाम का यह मसौदा केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 92 के तहत जारी किया गया है। इससे जुड़े मूल नियमों को चार दिसंबर, 2020 को अधिसूचित किया गया था और अंतिम बार 30 अगस्त, 2022 को संशोधित किया गया था।
यह प्रस्तावित पाबंदी संशोधन के अंतिम रूप से मंजूर होने और लागू होने के बाद ही प्रभावी होगी। यह शिशु आहार में मिलने वाली सभी प्रकार की शर्करा या कार्बोहाइड्रेट पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य शुरुआती बचपन में भोजन में अलग से मिलाई जाने वाली शक्कर (एडेड शुगर) से बचाना है, ताकि बच्चों में मोटापे और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सके। इसके अलावा यह प्रस्ताव जीवन के पहले छह महीनों के दौरान केवल स्तनपान कराने की सार्वजनिक स्वास्थ्य सिफारिशों के भी अनुकूल है।

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