
जबलपुर। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद निकली राख में पारा की मात्रा उपस्थित होने के संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की गयी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 27 नवम्बर को निर्धारित की है।
युगलपीठ ने कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष के अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उनके तर्कों को नहीं सुना जायेगा।
भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण किये जाने की मांग करते हुए आलोक प्रताप सिंह द्वारा साल 2004 में दायर किया गया था। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के कारण हाईकोर्ट उक्त मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश में यूका के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर जिला धार में किया गया था।
पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के बावजूद भी आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी की सप्लाई से स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर होने वाले गंभीर खतरा का मुद्दा उठाया गया था। युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल लेकर और उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किये थे।
पिछली सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गयी। संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने से बची हुई राख में पारा विश्लेषण तथा प्रदूषण पाया गया है। राख का विनष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के बहुत करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है। सरकार की तरफ से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पैरामीटर तय सीमा के अंदर हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा गया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से राख में उपस्थित पारा के संबंध में रिपोर्ट पेश की गयी।
