इंदौर। शहर में जलसंकट को लेकर चिंता और मंथन दोनों चल रहे है। नगर निगम को एक माह बाद यानि 15 नवंबर से पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके तहत शहर में 450 एमएलडी पानी आवश्यकता होगी। इसके उलट स्थिति यह है कि शहर में नगर निगम के जलकर खाते सिर्फ 2.5 लाख है और शहर में ही बिजली के कनेक्शन 8 लाख के करीब है।
ताजा जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा शहर में पानी की समस्या को देखते हुए मांग और आपूर्ति के बीच एक सर्वे की चर्चा है। सर्वे के आंकड़े आश्चर्यचकित करने वाले सामने आए है, जिसमें शहर में जलकर के ढाई लाख से ज्यादा खाते हैं। ढाई लाख जलकर खातों से निगम को सिर्फ 57.75 लाख रुपए राजस्व मिलता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि शहर में बिजली के 8 लाख से ज्यादा कनेक्शन है। यही नहीं 40 लाख से ज्यादा आबादी के शहर में 5.25 संपत्तिकर खाते हैं। मतलब यह है कि आबादी और बिजली कनेक्शन के हिसाब से शहर की आधी जनता को निशुल्क पानी दिया जा रहा है।
अब इससे बढक़र यह है कि नगर निगम को जलूद से नर्मदा का पानी लाने और शहर में तानकरेवम बिजली बिल का खर्चा 360 करोड़ रुपए है। इसमें भी नगर निगम को 250 करोड़ रुपए सालाना विद्युत विभाग को भुगतान करना पड़ते हैं।
एक बड़ी समस्या यह है कि जलकर वसूली में पार्षद ओर जनप्रतिनिधियों का बड़ा हस्तक्षेप है। शहर में बिना कनेक्शन के नर्मदा का पानी बांटा जा रहा हैं और जलकर के बिल माफ करने का भी अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है। बताया जाता है कि नगर निगम का इंदौर में टैंकर से पानी वितरण करने का खर्च दूसरे शहरों के कुल बजट से बहुत ज्यादा है। नगर निगम द्वारा एक टैंकर को दिन में 5 ट्रिप के 2200 सौ रुपए भुगतान किया जाता है। अभी फिलहाल स्थिति यह है कि 3 सौ टैंकर रोज पानी वितरण कर रहे है। करीब दो करोड़ रुपए मासिक टैंकरों पर खर्च हो रहा है।
समझा जा सकता है कि गर्मी में 800 टैंकर का करीब चार माह का निगम पर 22 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च आएगा। साथ ही इस साल कम बारिश के कारण जलसंकट में बिजली बिल भुगतान का खर्च भी 10 प्रति माह बढक़र आना तय है।
जांच अभियान चलाएंगें : शर्मा
जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा ने कहा कि शहर में 20 प्रतिशत नर्मदा लाइन नहीं है। दूसरा बड़े मॉल या मल्टी स्टोरीज में एक बल्क कनेक्शन होता है, इसलिए बिजली बिल और नल कनेक्शन में अंतर आ रहा है। इसके अलावा पिछली बार अभियान चलाकर 25 हजार अवैध से वैध कनेक्शन किए थे। अभी निगम फिर से बिजली विभाग, संपत्तिकर खाते के अनुसार जांच अभियान चलाकर नल कनेक्शन की संख्या को बढ़ाने की योजना शुरू करेगा।
