इस अवसर पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) लव अग्रवाल भी उपस्थित थे।
श्री गोयल ने डेटा-संचालित और साक्ष्य-आधारित व्यापारिक निर्णय लेने में एनएसटीसीसी की भूमिका की सराहना की। केंद्र में ‘स्कोमेट’ (विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकियां) डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए उन्होंने लंबित आवेदनों के निपटारे और सभी आवेदनों पर जल्द निर्णय सुनिश्चित करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर साप्ताहिक बैठकें करने की भी सलाह दी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग द्वारा विकसित एनएसटीसीसी एक रणनीतिक पहल है। इसका उद्देश्य एकीकृत डेटा विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार तंत्र की निगरानी, विश्लेषण और प्रबंधन को मजबूत करना है।
इस कमान केंद्र की परिकल्पना वरिष्ठ नीति निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों को भारत के व्यापार प्रदर्शन, निर्यात संवर्धन योजनाओं, नियामकीय मंजूरियों, आवेदन प्रक्रिया और परिचालन संबंधी संकेतकों की एकीकृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए की गई है। विभिन्न व्यापार-संबंधी प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों को एक मंच पर लाकर यह उभरते रुझानों, परिचालन संबंधी बाधाओं और नीतिगत या प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान करने में मदद करेगा।
एनएसटीसीसी के केंद्र में एक एकीकृत विश्लेषण एवं दृश्यांकन मंच है, जिसे व्यापार-संबंधी आंकड़ों को उपयोगी जानकारी में बदलने के लिए विकसित किया गया है। इसके इंटरैक्टिव डैशबोर्ड प्रमुख व्यापार संकेतकों, योजनाओं के प्रदर्शन, लंबित आवेदनों, प्रसंस्करण की समयसीमा, क्षेत्रीय रुझानों और अनुपालन संबंधी मानकों की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
यह मंच भूमिका-आधारित पहुंच व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शन, क्षेत्रीय प्राधिकरणों, योजनाओं, उत्पादों, गंतव्य बाजारों और व्यक्तिगत आवेदनों समेत विभिन्न स्तरों पर आंकड़ों का विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है।
प्रारंभिक चरण में कमान केंद्र में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के प्रमुख कार्यों और व्यापार-संबंधी गतिविधियों के डैशबोर्ड शामिल किए गए हैं। इनमें आयात-निर्यात कोड (आईईसी), अग्रिम प्राधिकरण, निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (ईपीसीजी) योजना, उत्पत्ति प्रमाणपत्र, स्कोमेट, प्रतिबंधित आयात-निर्यात तथा अन्य नियामकीय और व्यापार सुगमता प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन डैशबोर्ड के माध्यम से क्षेत्रीय प्राधिकरणों में योजनाओं के उपयोग, प्रसंस्करण दक्षता, निर्यात दायित्वों, व्यापार के रुझानों और परिचालन प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी।
एनएसटीसीसी को व्यापार प्रशासन के तीन प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। पहला, व्यापार के रुझानों, आवेदन प्रक्रिया, लंबित मामलों और उभरते जोखिमों की एकीकृत निगरानी करना, ताकि परिचालन संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका समाधान किया जा सके।
दूसरा, निर्धारित प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर योजनाओं, प्रक्रियाओं और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के प्रदर्शन की निगरानी तथा तुलनात्मक मूल्यांकन करना, जिससे कमियों और सुधार की संभावनाओं की पहचान हो सके।
तीसरा, साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव उपलब्ध कराना। इसके तहत बार-बार सामने आने वाली बाधाओं, प्रक्रियागत जटिलताओं और उभरते व्यापार रुझानों की पहचान कर नीतियों को सरल बनाने, प्रक्रियाओं में सुधार लाने और व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए लक्षित उपाय किए जा सकेंगे।
यह पहल उत्पाद और बाजार के आधार पर विश्लेषण, व्यापार समझौतों के उपयोग का आकलन, निर्यात के अवसरों की पहचान तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की व्यापारिक स्थिति की निगरानी के माध्यम से देश की व्यापार खुफिया क्षमताओं को भी मजबूत करेगी।
एनएसटीसीसी को डीजीएफटी की प्रणालियों और ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म’ सहित मौजूदा डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग करने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही, यह अन्य विभागों और व्यापार-संबंधी एजेंसियों के आंकड़ों को चरणबद्ध तरीके से एकीकृत करने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराएगा।
भविष्य में इस कमान केंद्र को एक व्यापक, समग्र सरकारी निर्णय-समर्थन तंत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत संबंधित मंत्रालयों, राज्यों, निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य संस्थानों जैसे अधिकृत हितधारकों को चरणबद्ध तरीके से पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। अतिरिक्त आंकड़ों को शामिल करने, स्वचालित अलर्ट और उन्नत विश्लेषण के माध्यम से इसकी क्षमताओं को भी लगातार मजबूत किया जाएगा।
