इससे उत्सवों के दौरान होने वाले शोर और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियां और सख्त हो गई हैं। न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और नीला के. गोखले की खंडपीठ ने सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक शोर और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
यह फैसला दिवाली से ठीक पहले आया है। इससे पहले सितंबर में भी न्यायालय ने गणेशोत्सव सहित अन्य त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। न्यायालय का यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य, हवा की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा पर पटाखों के धुएं और तेज शोर के बुरे प्रभावों को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच आया है। सड़कों पर पटाखे जलाने से पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा होता है, खासकर त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले जुलूसों में।
खंडपीठ ने इससे पहले की सुनवाई में शोर की तय सीमा को लागू करने और लाउडस्पीकर, तेज संगीत प्रणालियों तथा पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा था। न्यायालय ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया था कि वे त्योहारों के दौरान लेजर लाइट और बहुत तेज रोशनी वाली लाइटों के इस्तेमाल पर रोक लगाएं।
न्यायालय ने जोर देकर कहा कि केवल त्योहार मनाए जा रहे हैं, इस आधार पर शोर प्रदूषण से जुड़े मौजूदा नियमों में ढील नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने इसके साथ ही राज्य सरकार और पुलिस से इन नियमों को सख्ती से लागू करने को कहा।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को मिलकर समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नोटिस जारी करना चाहिए। इसमें स्पष्ट रूप से कहा जाए कि सभी सार्वजनिक स्थानों, जैसे सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
इस नये आदेश का मुख्य जोर सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखों के इस्तेमाल पर साल भर पाबंदी लागू रखने पर है, न कि इसे केवल कुछ खास त्योहारों तक सीमित रखने पर।
