छिंदवाड़ा: स्थानीय श्रीरामलीला मंच छोटी बाज़ार में चल रही श्रीरामलीला का मंचन देखने के लिए दिन प्रतिदिन लोगो की संख्या में वृद्धि हो रही है। इस वर्ष आकर्षक साज सज्जा एवं आधुनिक संसाधनों के साथ किये जा रहे मंचन से नगर में श्री रामलीला को लेकर नया उत्साह दिखाई पड़ रहा है। वरिष्ठ कलाकार एवं संरक्षक विजय आनंद दुबे ने बताया कि खर दूषण की मृत्यु का समाचार लेकर शूर्पणखा रावण के पास पहुँचती है एवं सम्पूर्ण वृत्तांत बताती है। यह सूचना रावण को मिलते ही रावण तिलमिला जाता है, युक्ति की खोज में रावण मारीच के पास पहुंचता है और उस पर दबाव बनाता है कि अगर वह श्री राम के पास स्वर्ण मृग बनकर नहीं जाएगा तो रावण उसका वध कर देगा।
धर्म संकट में पड़े मारीच को श्रीराम के हाथों मोक्ष प्राप्त करना ही उचित लगता है और वह रावण की बात मानकर पंचवटी की ओर स्वर्णमृग बनकर निकल जाता है। मारीच के स्वर्ण मृग बनकर आते ही सीता मां उल्लासित हो जाती हैं और श्री राम को उसे पकड़ लाने के लिए कहती हैं श्री राम हिरण के पीछे पीछे जाने से पहले लक्ष्मण को कुटिया के पास ही ठहरने की आज्ञा देते हैं। जिस वक्त श्रीराम हिरण को पकड़कर लाने का प्रयास करते हैं मारीच श्री राम की आवाज में लक्ष्मण को सहायता के लिए पुकारता है। माता सीता की आज्ञा से लक्ष्मण एक रेखा खींचकर श्री राम की सहायता को ढूंढने निकल पड़ते हैं, कुटिया में सीता माता को अकेला पाकर रावण साधु का छद्म रूप धरकर कुटिया में भिक्षा मांगने आ जाता है.
जब सीता माता भिक्षा के लिए भोजन एकत्रित करने कुटिया के अंदर जाती हैं तब रावण रेखा को पार करने की नाकाम कोशिश करता है और अग्नि से झुलसते हुए बचता है उसे समझ आ जाता है कि यहां जरूर कोई माया रची गई है वो सीता माता को कुटिया के परिक्षेत्र से बाहर आकर भिक्षा देने की बात पर उन्हें मना लेता है, सीता माता जैसे ही बार आती है रावण अपना असली रूप धरकर सीता माता को हरण करके लंका की ओर ले जाता है रास्ते में जटायु से युद्ध होने पर जटायु के दोनों पर काट देता है, श्री राम लौटकर सीता के वियोग में तड़पते हैं, सीता माता को ढूंढते ढूंढते जटायु तक पहुंचते हैं जटायु का अंतिम संस्कार करते है।
