ग्वालियर:सिंधिया राजघराने की लगभग 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में ग्वालियर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने प्रतिमा देवी राणा की गवाही के लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्माराम टांक की अदालत में अब प्रतिमा राणा को बंटवारे के समझौते पर हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए जाने के अपने आरोपों के समर्थन में बयान और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर दावा किया है कि समझौते के दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर स्वेच्छा से नहीं कराए गए थे।
प्रतिमा राणा की आपत्ति का मुख्य आधार पारिवारिक समझौते में संपत्ति के कथित असमान बंटवारे को लेकर है। उनका कहना है कि उनकी माता की अन्य तीन बहनों, अर्थात उनकी तीन मौसियों ने कथित समझौते में अपने लिए अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा रखा है, जबकि उनके हिस्से में तुलनात्मक रूप से बहुत छोटा और नगण्य हिस्सा आया है। उनका आरोप है कि परिवार के सदस्यों के बीच किया गया यह समझौता संतुलित और समान नहीं है तथा उन्हें उनके उचित पारिवारिक हिस्से की तुलना में बेहद कम हिस्सा दिया गया है।
उन्होंने समझौते पर आपत्ति जताते हुए मामले में दोबारा अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने और पैतृक संपत्ति में अपने अधिकारों पर विचार करने की मांग की है। उनके आरोपों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और ऊषा राजे के नाम शामिल हैं। हालांकि, हस्ताक्षरों को लेकर उठाए गए आरोपों की वैधता पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।
पहले एकपक्षीय घोषित हुई थीं प्रतिमा राणा
पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर मूल सिविल मुकदमा वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने दायर किया था। इसमें दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राणा को भी पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण दोनों को एकपक्षीय घोषित कर दिया गया था। बाद में प्रतिमा देवी ने अदालत में आवेदन देकर समझौते पर सवाल उठाए और अपनी आपत्तियों पर सुनवाई की मांग की।
अब गवाही पर टिकी निगाहें
मामले में अंतरिम आवेदनों और आपत्तियों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गवाही की तारीख निर्धारित की है। 29 अक्टूबर को प्रतिमा देवी के बयान और उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से यह स्पष्ट होगा कि समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर उनकी आपत्ति के समर्थन में क्या आधार पेश किए जाते हैं। इसके बाद अदालत मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लेगी। फिलहाल समझौते की वैधता और संपत्ति विवाद के अंतिम निपटारे को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। गौरतलब है कि प्रतिमा देवी ने यह आशंका भी जताई थी कि उनकी मौसियां उन्हें संपत्ति में उनका पूरा हिस्सा देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में सभी पक्षों के दावों और दस्तावेजों की निष्पक्ष पड़ताल महत्वपूर्ण हो जाती है।
