
सतना: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर चारों ओर देवी आराधना की गूँज है, शहर के बजरहा टोला मार्ग पर झूलेलाल मंदिर के समीप पंडाल में स्थापित माँ धूमावती की प्रतिमा के साथ जबलपुर क्रूज़ हादसे में बेटे के लिए माँ के समर्पण की अनूठी और भावुक झांकी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
इस झांकी में आस्था और श्रद्धा के साथ आधुनिक तकनीक का ऐसा सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है, जो शहरभर में लोगों के बीच चर्चा और कौतूहल का विषय बन गया है माँ धूमावती के साथ ही झांकी का मुख्य आकर्षण वह दृश्य है, जिसने कुछ महीने पहले पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम पर हुए क्रूज हादसे के दौरान का वह हृदयविदारक पल, जब एक माँ ने अपनी आखिरी सांस तक अपने मासूम बच्चे को सीने से कसकर चिपकाए रखा था, जिसे कलाकारों ने तकनीकी और कलात्मक के समन्वय से सजीव कर दिया है झांकी के नीचे एल ई डी पैनल के माध्यम से झरने का प्रदर्शन किया गया है माँ धूमावती के बाईं और भगवान झूलेलाल की मनमोहक प्रतिमा विराजित की गई है.
दस महाविद्याओं में से एक हैं धूमावती.
माँ धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं शक्ति मानी जाती हैं. इनका स्वरूप अन्य देवियों से बिल्कुल अलग है. ये विधवा रूप में, बिना आभूषणों के, बिना सवारी के कौए पर सवार रथ या सूप (शूर्प) पर आसीन रहती हैं. इन्हें संकट, दरिद्रता, आलस्य और अमंगल की नाशक तथा विशेष साधना में मोक्ष व अणिमा आदि सिद्धियों को देने वाली देवी माना जाता है. इनकी साधना गुप्त और तांत्रिक स्वरूप में विशेष रूप से की जाती है.
यह झांकी केवल मनोरंजन या दिखावे का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इंसानी संवेदनाओं, मातृप्रेम और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सचेत करने का एक सशक्त संदेश देती है. – डेटा राम भागदेव
शारदीय नवरात्रि में हर साल समिति कुछ अलग करती है इस बार माता पार्वती के विधवा स्वरूप धूमावती माता के साथ ही बरगी डैम में माँ के बेटे के प्रति करुणा और उसके अथाह प्रेम की झांकी बनाई गई है
