इंदौर: शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था और न्यायालयीन आदेशों के पालन में लापरवाही को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई. न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ के समक्ष राजलक्ष्मी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया कि शहर के 92 ट्रैफिक सिग्नलों में से केवल 28 आईटीएमएस से जुड़े हैं और यातायात पुलिस के 221 पद खाली हैं.
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने शहर के करीब 40 प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का सुझाव दिया. उनका प्रस्ताव है कि इससे लगभग 140 से 170 पुलिसकर्मियों को मुक्त कर शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर तैनात किया जा सकता है. साथ ही, यातायात पुलिस के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया की प्रगति और उपलब्ध बल के प्रभावी इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया. सुनवाई के दौरान नगर निगम के 311 एप पर दर्ज शिकायतों के वास्तविक निराकरण, विजय नगर चौराहे से देवास नाका तक सड़क की खराब स्थिति और सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों की कमी का मुद्दा भी उठा. शिकायतों पर कार्रवाई और लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई गई. पार्किंग की अपर्याप्त व्यवस्था पर ध्यान दिलाते हुए बताया गया कि इंदौर में 26 चिह्नित पार्किंग स्थल हैं, जबकि प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 पार्किंग स्थल हैं.
राहुल सेठी को समन्वय अधिकारी बनाने का प्रस्ताव…
वर्ष 2019 से लंबित इस जनहित याचिका में राजलक्ष्मी फाउंडेशन ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को यातायात सुधार और पूर्व न्यायालयीन निर्देशों के अनुपालन के लिए एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी बनाने का प्रस्ताव रखा. याचिकाकर्ता पक्ष ने संबंधित विभागों से नियमित प्रगति प्रतिवेदन लेने और 21 दिनों में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव भी दिया. इसमें ट्रैफिक सिग्नलों, सड़क मरम्मत, पुलिस तैनाती और पार्किंग व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई
