कुसमी (सीधी)। जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया में बिना सडक़ और नाले के पुलिया बन गई और बांध मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा हो गया। उमरिया पंचायत में लाखों के खेल का आरोप लगाया गया है।
ग्राम पंचायत उमरिया में निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की अनियमितता का मामला सामने आया हैं। पोर्टल पर दर्ज जानकारी और ग्रामीणों के दावों के मुताबिक कहीं लाखों की लागत से बनी पुलिया अधूरी पड़ी है तो कहीं सडक़ और नाले के अभाव में पुलिया की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं चेक डैम एवं बांध की मरम्मत के नाम पर 10 लाख रुपये का कार्य दर्ज होने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर कोई काम नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने पंचायत में करीब 50 लाख रुपये के कथित फर्जी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत के अनुसार पोर्टल में दर्ज कार्य आईडी क्र. 101356079 के अनुसार ग्राम अंतरैला में केमला प्रजापति के घर के पास पुलिया निर्माण की लागत 14 लाख 31 हजार रुपये दर्ज है। पुलिया की लंबाई 7 मीटर बताई गई है लेकिन स्थल निरीक्षण में पुलिया का निर्माण अधूरा पाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे आवागमन भी सुचारु नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो इसकी वास्तविक प्रगति और भुगतान की स्थिति क्या है? यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में काम करने वाले मजदूरों को अब तक मजदूरी नहीं मिली है। इसी पंचायत में उमरिया गांव में नागेश्वर बादी के घर के पास पुलिया निर्माण के लिए पांच लाख रुपये की लागत दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर पुलिया बनाई गई है वहां न तो सडक़ है और न ही नाला। ऐसे में पुलिया की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व सरपंच विनय सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत में मनमानी और भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी की गई हैं लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई ठोस जांच कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि बांध या चेक डैम की मरम्मत के नाम पर काम नहीं कराया गया और अनुपयोगी स्थान पर पुलिया बनाई गई है। उन्होंने जिला प्रशासन से सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
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बांध मरम्मत के नाम पर 10 लाख रूपये का कार्य
कार्य आईडी क्र. 101340188 में बांध के रख-रखाव एवं मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये की लागत दर्ज होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर मरम्मत का कोई काम नहीं कराया गया। कागजों में कार्य दर्शाकर राशि के उपयोग में अनियमितता की गई है। ग्रामीणों ने इन कार्यों के अभिलेख, मूल्यांकन प्रतिवेदन, माप पुस्तिका और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का दावा है कि ये मामले केवल उदाहरण हैं और पंचायत में अन्य निर्माण कार्यों में भी अनियमितताएं हुई हैं। उनके मुताबिक ऐसे कार्यों की कल राशि करीब 50 लाख रुपये है।
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इनका कहना है
निर्माण कार्यों को लेकर शिकायत मिलने के बाद भुगतान रोक दिया गया है। अब मामला उनके संज्ञान में आया हैए इसलिए इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा और फर्जीवाड़ा पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
ज्ञानेन्द्र मिश्रा, सीईओ, जनपद पंचायत कुसमी
