वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से डीजल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही ट्रंप के इस कदम पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस सहित छह सांसदों के एक संयुक्त समूह ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति का यह कदम वर्ष 2022 के रूस प्रतिबंध कानून और हाल ही में पास हुए ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग एक्ट 2026’ की भावना के बिल्कुल खिलाफ है। सांसदों का कहना है कि जब रूस यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है, तब अमेरिकी प्रशासन द्वारा मॉस्को के साथ ऊर्जा व्यापार करना गैर-कानूनी है और इससे रूसी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचेगा।
18 अक्टूबर की डेडलाइन पर टिकी दुनिया की निगाहें, रूसी तेल के शीर्ष खरीदारों पर प्रतिबंधों को लेकर घिरे ट्रंप
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग एक्ट 2026’ की धारा 113 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे कानून बनने के 30 दिनों के भीतर यानी 18 अक्टूबर तक उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ (शुल्क) लगा सकते हैं, जो रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष खरीदार हैं। इसी वजह से 18 अक्टूबर की यह समयसीमा भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, सीनेट में रिपब्लिकन व्हिप जॉन बारासो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति इस कानून का इस्तेमाल पुतिन पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं और डीजल जैसे रिफाइंड उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में सीधे तौर पर नहीं आते हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने दी छूट की दलील, भारत और अन्य वैश्विक बाजारों पर इस फैसले के प्रभाव पर टिकी नजरें
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि कानून में राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि यदि राष्ट्रीय हित में आवश्यक हो, तो वे कांग्रेस को सूचित करके टैरिफ में छूट प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, विश्लेषकों का मानना है कि इस कानून का मुख्य ध्यान कच्चे तेल (Crude Oil) पर है, न कि रिफाइंड डीजल पर। फिर भी, वाशिंगटन में जारी इस अंदरूनी खींचतान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब सभी रणनीतिक विशेषज्ञों और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की निगाहें 18 अक्टूबर के उस फैसले पर टिकी हैं, जब ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीद को लेकर अपने अंतिम नीतिगत कदम का आधिकारिक ऐलान करेगा।

