अयोध्यापुरी जमीन के मामले में संस्था के खिलाफ फैसला

इंदौर:शहर में विवादित देवी अहिल्या गृह निर्माण संस्था की अयोध्यापुरी कॉलोनी में जमीन के मामले में कोर्ट ने संस्था के खिलाफ फैसला दिया है. इस कारण यह है कि कोर्ट में एसडीओ एवं कलेक्टर सुनवाई में शासन का पक्ष नहीं रखा है. जिला कोर्ट द्वारा चार एकड़ जमीन पर संस्था सदस्यों के प्लॉट और रजिस्ट्री के दस्तावेज नहीं होने का आधार मानकर फैसला दिया है.शहर में प्लॉटों की गड़बड़ी और भू माफियाओं को जमीन बेचने के लिए विवादित देवी अहिल्या गृह निर्माण संस्था को जिला कोर्ट से झटका लगा है. जिला कोर्ट ने भू माफिया प्रतीक संघवी, दीपक मद्दा और मुकेश खत्री की सिंप्लेक्स इन्वेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी को बेची ४ एकड़ जमीन की रजिस्टी को वैध मानते हुए रहवासियों और संस्था के खिलाफ फैसला सुनाया है.

बताया जा रहा है कि उक्त जमीन की वर्तमान कीमत ३५० करोड़ रुपए से ज्यादा है. २६ वें जिला कोर्ट न्यायधीश डॉ शुभ्रा सिंह ने अध्योध्यपुरी के रहवासियों, प्लॉट धारकों एवं देवी अहिल्या गृह निर्माण संस्था के द्वारा दायर प्रकरण पर फैसला सुनाते हुए चार एकड़ जमीन की रजिस्टी की सभी पाया है. साथ ही संस्था एवं सदस्यों के प्लॉट एवं रजिस्ट्री दस्तावेज नहीं होने को आधार माना है. उक्त मामले में एसडीओ एवं कलेक्टर को भी पक्षकार बनाया गया था, लेकिन दोनों अधिकारियों द्वारा कोर्ट के समक्ष शासन का पक्ष नहीं रखा गया. शासन का कोर्ट में पक्ष नहीं रखने के कारण रहवासियों एवं संस्था के खिलाफ भूमाफियों संघवी, मद्दा और खत्री के ३५० करोड़ रुपए की बेशकीमती जमीन हाथ लग गई. उक्त मामले में माना जा रहा है कि जिला कोर्ट के निर्णय के खिलाफ संस्था, अयोध्यापुरी के रहवासी एवं प्लॉट धारकों के साथ शासन हाईकोर्ट में अपील कर सकता है.

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