
जबलपुर। हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण-पत्र निरस्त करने के रांझी के एसडीएम के आदेश को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने मामले को राज्य स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि समिति जाति प्रमाण-पत्र की जांच करती है, तो याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
यह याचिका रांझी, जबलपुर निवासी भारती बागरी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि रांझी तहसील के एसडीएम ने 25 अगस्त 2026 को उनका अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता राजेश कुमार नामदेव ने पक्ष रखा कि जाति संबंधी स्थिति पर संदेह होने की दशा में निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के माधुरी पाटिल प्रकरण में दिए गए न्याय दृष्टांत का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि जाति संबंधी दावे की जांच राज्य स्तरीय जाति जांच समिति के माध्यम से की जानी चाहिए। एसडीएम ने मामले को निर्धारित समिति के समक्ष भेजे बिना ही प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने एसडीएम के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही, जाति प्रमाण-पत्र की जांच के लिए मामला राज्य स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत करने और याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के संबंध में निर्देशात्मक व्यवस्था स्पष्ट की।
