पुलिस के अभेद्य सुरक्षा चक्र के कारण सीजेपी व छात्रों का आंदोलन विफल

नई दिल्ली, अभूतपूर्व छावनी में तब्दील लूटियन दिल्ली में काकरोच जनता पार्टी व विभिन्न छात्र संगठनों के आह्वान पर आयोजित आंदोलन सफल नहीं हो सका. सीजेपी के वरिष्ठ नेताओं व आईसा समेत अन्य छात्र इकाईयों से जुड़े नेताओं को पुलिस ने या तो हवाई जहाज से या घरों व रास्तों से ही गिरफ्तार कर धरना स्थल तक जाने से रोक दिया. हालांकि छोटे-छोटे समूहों में आए प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए पुलिसबल को हल्का बल प्रयोग करते हुए दौड़ भाग करनी पड़ी.

चौतरफा नाकेबंदी के कारण लगभग चार हजार आंदोलनकारियों को विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार कर डिटेंशन सेंटर में रखना पड़ा.

देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सीजेपी व अन्य छात्र इकाईयों के बड़े आंदोलन के आह्वान के बाद अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला. इस छात्र और युवा आंदोलन को विफल करने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 23,000 से अधिक जवानों को तैनात कर पूरे मध्य दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर भारी मेटल बैरिकेडिंग कर दी गई, 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को बंद कर दिया गया और कुछ संवेदनशील हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया था. इस बड़े आंदोलन को रोकने के लिए की गई देशव्यापी पुलिसिया धरपकड़ के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने और धारा 163 के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने लगभग चार हजार से अधिक आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुंबई से दिल्ली पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के भीतर से ही विशेष सेल की टीम द्वारा हिरासत में ले लिया गया. इस कार्रवाई के तुरंत बाद इस आंदोलन को अपना मुखर समर्थन देने दिल्ली पहुंचे देश के दिग्गज विपक्षी नेताओं पर भी भारी पुलिसिया कार्रवाई की गाज गिरी. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर से तृणमूल कांग्रेस के अन्य सांसदों और बड़े नेताओं के साथ दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें कैदी वाहन में बिठाकर थाने में भेज दिया. वहीं दूसरी तरफ अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व सांसद संजय सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

जंतर-मंतर के मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं टूटा और मध्य दिल्ली के विभिन्न हिस्सों जैसे कनॉट प्लेस, हनुमान मंदिर रोड़ , गुरूद्वारा रोड़ के आसपास छोटी-छोटी टुकड़ियों में विरोध प्रदर्शन शुरू रहा. दोपहर होते-होते कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई, जहां कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर पत्थरबाजी किए जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और दर्जनों युवाओं को जबरन बसों में भरकर डिटेंशन सेंटर्स भेजा. छात्र संगठनों और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आईसा के नेताओं ने साफ किया कि प्रशासन भले ही उनके शरीर को डिटेन कर ले, लेकिन लोकतंत्र को बचाने के इस बड़े जन-आंदोलन की भावना को वे कैद नहीं कर सकते.

इतना ही नहीं दिल्ली की सभी सीमाओं पर तैनात पुलिसबल ने संभावित प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में घुसने से रोक दिया. सभी प्रमुख बस स्टैंड व रेलवे स्टेशनों से भी बाहर निकल रहे यात्रियों की पहचान व दिल्ली आने के उद्देश्य की गहन पड़ताल करने के बाद ही आगे बढ़ने दिया गया. इसके अलावा जिन मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही चल रही थी वहां भी जेन जी यात्रियों को सघन पड़ताल के बाद जरूरी होने पर ही आगे बढ़ने दिया गया नहीं तो ज्यादातर जगहों से उन्हें सख्त लहजे में वापस लौटने को बोला गया.

प्रतिक्रिया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन से डरकर पूरी दिल्ली को बंधक बना लेना और जनता की आवाज दबाने के लिए देश के बड़े नेताओं को जेलों में ठूंसना यह साबित करता है कि मौजूदा सत्ता अपनी विदाई के डर से कांप रही है. उन्होंने साफ किया कि नागरिकों के वोटिंग के अधिकार को चुराने की हर कोशिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी एक्स पर सरकार को घेरते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति और4000 शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना जनता का बुनियादी अधिकार है. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक और तानाशाही की पराकाष्ठा करार देते हुए कहा कि लाठी और गिरफ्तारी के दम पर करोड़ों नागरिकों की वाजिब चिंताओं और उनके गुस्से को दबाया नहीं जा सकता.

हिरासत में ली गईं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे देश में लोकतंत्र की हत्या करार दिया. उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को शांतिपूर्ण मार्च करने से रोकना पूरी तरह असंवैधानिक है. उन्होंने साफ किया कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के रवैये और देश के करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से गायब किए जाने के खिलाफ आवाज उठा रही थीं, और केंद्र सरकार केंद्रीय बलों के पीछे छिपकर विपक्ष को डराना चाहती है, लेकिन वे डरने वाली नहीं हैं और यह आंदोलन अब और तेज होगा.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज दिल्ली की स्थिति देश के इतिहास के सबसे काले दौर की याद दिलाती है. शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने जा रहे नेताओं और देश के युवाओं को अपराधियों की तरह बसों में भरकर डिटेंशन सेंटर्स में बंद किया जा रहा है, जो कि आपातकाल से भी बदतर और खौफनाक है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश का नागरिक अपने मताधिकार की सुरक्षा के लिए आवाज भी नहीं उठा सकता, तो हम किस लोकतंत्र में जी रहे हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोक लिया, जिससे साफ है कि सरकार युवाओं की ताकत से डरी हुई है. उन्होंने संकल्प दोहराया कि प्रशासन भले ही उनके शरीर को डिटेन कर ले, लेकिन युवाओं के इस वैचारिक आंदोलन को कैद नहीं किया जा सकता और उन्हें जहां भी रोका जाएगा, वही जगह उनका जंतर-मंतर बन जाएगी.

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