भोपाल: न्यू मार्केट में गुरुवार को लगी आग ने एक ऐसे कारोबारी के सपनों को राख कर दिया, जिसने दुकान शुरू करने के लिए बैंक से 1.11 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और बाजार से 45 लाख रुपए उधार जुटाए थे. दुकान में पूजा तो हुई, लेकिन कारोबार शुरू होने से पहले ही आग ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. दुकान का बीमा भी नहीं हो पाया था. गुरुवार को छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ने देखते ही देखते छह दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया. आग इतनी तेजी से फैली कि बाजार में भगदड़ मच गई. व्यापारी, ग्राहक और राहगीर जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए. आग बुझाने में दमकल की टीम को करीब पांच घंटे मशक्कत करनी पड़ी. घटना में करीब पांच से छह करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। वहीं तीसरी मंजिल पर फंसे तीन लोगों को छलांग लगाकर अपनी जान बचानी पड़ी. आग से बालाजी छोले-भटूरे, उसके ऊपर आम्रपाली छोले-भटूरे, सूट की दुकान, लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रदीप बर्तन भंडार और विजय स्टोर को भारी नुकसान हुआ है. आग से भवन भी जर्जर हो गया है. आग लगने के कारणों को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं. इसकी वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
-शुरू होने से पहले ही जल गई दुकान, करोड़ों का सामान राख
आग में कुछ दुकानदारों को ऐसा नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी. प्रदीप बर्तन भंडार के संचालक मनोज ताम्रकार ने करीब छह महीने पहले दुकान किराये पर ली थी. उन्होंने दुकान में सामान भरने के लिए बैंक से 1 करोड़ 11 लाख रुपए का मॉर्गेज लोन लिया था. इसके अलावा करीब 45 लाख रुपए बाजार से लिए थे। दुकान की अभी पूजा ही हुई थी और कारोबार शुरू भी नहीं हुआ था. दुकान का बीमा भी नहीं हो पाया था.
अतिक्रमण के कारण दमकल को अंदर पहुंचने में हुई परेशानी
न्यू मार्केट के व्यापारियों का कहना है कि बाजार के अंदर और प्रवेश मार्गों पर लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या है. ठेले और दुकानों के बाहर रखा सामान रास्ते को संकरा कर देता है. इससे दमकल को आग वाले स्थान तक पहुंचने में परेशानी हुई. व्यापारियों का कहना है कि वे कई बार नगर निगम से अतिक्रमण हटाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई.
-व्यापारियों की अतिक्रमण हटाने और स्थायी रूप से फायर ब्रिगेड की व्यवस्था की मांग
न्यू मार्केट के व्यापारियों ने अब बाजार के सभी प्रवेश मार्गों से अतिक्रमण हटाने और स्थायी रूप से फायर ब्रिगेड की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटना होने पर कुछ मिनट की देरी भी बड़ा नुकसान कर सकती है.
-इनका कहना है
दुकान शुरू करने के लिए बैंक से मॉर्डगेज के माध्यम से एक करोड़ 11 लाख का कर्जा लिया था. दुकान शुरू करने से पहले बीमा करवाना था. अब पूरा सामान जलकर बर्बाद हो गया. बैंक का कर्ज भी है और कारोबार शुरू होने से पहले ही सब खत्म हो गया.
मनोज ताम्रकार, पीडि़त, प्रदीप बर्तन भंडार
उन्होंने करीब एक महीने पहले ही दुकान में लगभग एक करोड़ रुपए का मोबाइल और अन्य सामान भरा था. आग इतनी तेज थी कि सामान निकालने का मौका ही नहीं मिला. पूरा सामान जल गया। मैं पूरी तरह बर्बाद हो गया हूं.
अंकित, पीडि़त, लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल
दुकान के ऊपर लगे मीटर से शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग भडक़ने की बात सामने आई है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी.
दीप अग्रवाल, पीडि़त, संचालक बालाजी छोले-भटूरे
कोऑपरेटिव बैंक के पास से अंदर आने का रास्ता अब पतली गली जैसा रह गया है. जनहित में न्यू मार्केट के सभी एंट्री प्वाइंट क्लियर होने चाहिए, ताकि ऐसी घटना में फायर ब्रिगेड आसानी से मौके तक पहुंच सके.
प्रदीप गुप्ता, अध्यक्ष न्यू मार्केट व्यापारी संघ
स्मार्ट पार्किंग के पास हमेशा एक दमकल खड़ी रहती थी, लेकिन घटना के दिन तकनीकी खराबी के कारण वह उपलब्ध नहीं थी. उनके अनुसार, यदि वह दमकल मौके पर रहती तो स्थिति और बेहतर तरीके से संभाली जा सकती थी.
नानक दुआ, अध्यक्ष व्यापारी महासंघ
हनुमान मंदिर के पास रेहड़ी वालों के अतिक्रमण के कारण दमकल को परेशानी हुई.
सतीश गंगराड़े, अध्यक्ष संरक्षण समिति
मुझे 3:05 बजे आग की सूचना मिली और 3:15 बजे घटनास्थल पर पहुंच गया था. मैने मौके पर पहुंचकर नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन को जरूरी दिशा-निर्देश दिए और व्यापारियों को शासन स्तर पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया.
भगवानदास सबनानी, विधायक
निगम को 2:55 बजे सूचना मिली और 3:10 बजे दमकलें पहुंच गई थीं. अतिक्रमण के कारण थोड़ी परेशानी हुई. बाजार अतिक्रमण मुक्त रहना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बाधा न आए.
मालती राय, महापौर
सूचना मिलने के पांच मिनट के अंदर दमकल मौके पर पहुंच गई थी. आग बुझाने में करीब 30 कर्मचारी लगाए गए. उन्होंने भी माना कि बाजार में अतिक्रमण के कारण दमकलों को अंदर पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी.
सौरभ पटेल, फायर अधिकारी
