नयी दिल्ली, 08 अक्टूबर (वार्ता) टाटा समूह की विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया, उसकी सहयोगी एयरलाइंस एयर इंडिया एक्सप्रेस और नवोदित विमान सेवा कंपनी अकासा एयर ने “विमान ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि” के कारण 09 अक्टूबर से ईंधन शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है।
इन तीन कंपनियों से पहले देश की प्रमुख विमान सेवा कंपनी इंडिगो ने 05 अक्टूबर को ईंधन शुल्क में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि विमान सेवा कंपनियों के कुल परिचालन व्यय में 35-40 प्रतिशत इसी मद में खर्च होता है।
एयर इंडिया ने गुरुवार को बताया कि घरेलू मार्गों पर 500 किमी तक ईंधन शुल्क बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है। अब 501 किमी से एक हजार किमी की उड़ान के लिए 600 रुपये और 1,001 किमी से 1,500 किमी तक के लिए 850 रुपये का ईंधन शुल्क देना होगा। 1,501 किमी से दो हजार किमी तक के लिए ईंधन शुल्क 1,200 रुपये होगा। इससे लंबी दूरी की उड़ान के लिए भी शुल्क 1,200 रुपये ही रखा गया है।
उत्तरी अमेरिका की उड़ानों के लिए ईंधन शुल्क 215 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया के लिए 210 डॉलर, ब्रिटेन सहित पूरे यूरोप के लिए 135 डॉलर और पश्चिम एशिया के लिए 55 डॉलर तय किया गया है।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए भी यही शुल्क लागू होंगे। एयर इंडिया की आज आधी रात से बुक होने वाले टिकट पर बढ़ा हुआ ईंधन शुल्क देना होगा। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए नया शुल्क भारतीय समय अनुसार, शुक्रवार पूर्वाह्न 11 बजे से लागू होगा।
अकासा एयर ने बताया की आज आधी रात से बुक कराए गए टिकटों पर नये शुल्क लागू होंगे। उसने घरेलू मार्गों पर पहली बार ईंधन शुल्क लगाया है जबकि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर इसमें वृद्धि की है।
अकासा की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि घरेलू मार्गों पर ईंधन शुल्क 375 रुपये से 1,150 रुपये तक होगा। पांच सौ किमी तक की उड़ान के लिए ईंधन शुल्क 375 रुपये होगा। वहीं, 501 किमी से एक हजार किमी की उड़ान के लिए यात्रियों को 600 रुपये और 1,001 किमी से 1,500 किमी तक के लिए 900 रुपये का शुल्क देना होगा। इससे लंबे सफर के लिए 1,150 रुपये का ईंधन शुल्क देना होगा।
कंपनी ने अपने मौजूदा सभी अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर 2,500 रुपये का ईंधन शुल्क लगाया है। वर्तमान में वह कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और वियतनाम के लिए उड़ानों का परिचालन कर रही है।
कंपनी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक संकट के कारण विमान ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हए यह फैसला किया गया है।
