
इंदौर. रविवार से घटस्थापना के साथ ही शहर में नवरात्रि पर्व की धूम शुरू हो जाएगी. इसे लेकर शहरभर में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं. जगह-जगह बनाए जा रहे पंडाल अब पूर्णता की ओर हैं, वहीं देवी मंदिरों में भी साफ-सफाई, रंग-रोगन और आकर्षक सजावट का काम तेजी से चल रहा है. मंदिरों में विद्युत रोशनी, फूलों और विभिन्न सजावटी सामग्री से देवी दरबार को भव्य रूप दिया जा रहा है.
नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समितियां भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं. घटस्थापना, विशेष पूजन, आरती और नौ दिनों तक होने वाले धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की जा रही हैं. कई मंदिरों में प्रतिदिन माता के अलग-अलग स्वरूपों का विशेष श्रृंगार किया जाएगा, जिससे नवरात्रि के दौरान शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आएगा.
बिजासन माता मंदिर में नौ दिन होगा विशेष श्रृंगार
शारदीय नवरात्रि को लेकर बिजासन माता मंदिर में तैयारियां अंतिम दौर में हैं। पुजारी अशोक गोस्वामी ने बताया कि 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होगी और नौ दिनों तक माता का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया जाएगा. कन्या पूजन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे. देश, प्रदेश और इंदौर की सुख-शांति व समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी. मंदिर में रंग-रोगन, फर्श मरम्मत और विद्युत सज्जा का काम जारी है.
अन्नपूर्णा मंदिर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था पर जोर
अन्नपूर्णा मंदिर में नवरात्रि को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरि जी महाराज ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन के साथ समन्वय कर पार्किंग, प्रकाश और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है. नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ नौ दिवसीय नवचंडी पाठ और धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गर्भगृह में प्रवेश नहीं रहेगा और बैरिकेडिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराए जाएंगे.
अम्बावली माता मंदिर में विशेष दर्शन व्यवस्था
राजेंद्र नगर स्थित अम्बावली माता मंदिर में भी नवरात्रि की तैयारियां जारी हैं. मुख्य पुजारी पूरनसिंह परमार ने बताया कि संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन से व्यवस्थाओं के लिए पत्राचार किया गया है. नवरात्रि में विशेष पूजा-अर्चना, आरती, कन्या पूजन के साथ गोद भराई और बच्चों के नामकरण जैसे मांगलिक आयोजन होंगे. श्रद्धालुओं के लिए महिला-पुरुषों की अलग-अलग कतारें और प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी. समाज के करीब 100 बच्चे और युवा व्यवस्थाएं संभालेंगे.
