फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, बरी

गुना: फर्जी जाति प्रमाण पत्र के बहुचर्चित मामले में गुना के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा को हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए कोई फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाया था या दस्तावेजों की कूट रचना (फर्जीवाड़ा) कराई थी।

गुना विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र सिंह सलूजा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने के बाद पार्टी ने उन्हें समर्थन दिया था। उन्होंने सांसी समुदाय का जाति प्रमाण पत्र लगाकर आरक्षण का लाभ लिया और चुनाव जीतकर विधायक बने थे। चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा उनकी जाति पर सवाल उठाए गए और आरोप लगाया गया कि वे सामान्य वर्ग से हैं। अगस्त 2011 में जांच के बाद उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था। जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के खिलाफ सलूजा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो 2012 में खारिज हो गई थी। इसके बाद 2013 में उनकी रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दी गई, हालांकि तब तक वे अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे। मामले में नया मोड़ तब आया जब 2016 में तत्कालीन पार्षद वंदना मांडरे ने जनहित याचिका दायर कर मांग की कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर विधायक बनने के कारण उन्हें पेंशन व अन्य लाभ न दिए जाएं। हाईकोर्ट ने इस याचिका को द्वेषपूर्ण मानते हुए 2017 में खारिज कर दिया था और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अब लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

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