नई दिल्ली, भारत के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) आयात परिदृश्य में सितंबर के दौरान एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। ऊर्जा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ओमान भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है और उसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों और शिपिंग जोखिमों के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है।
सितंबर में ओमान की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 27 प्रतिशत पहुंची, नाइजीरिया दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर फिसला
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के महीने में भारत ने ओमान से कुल 5.85 लाख टन एलएनजी का आयात किया, जो अगस्त की तुलना में 11.6 प्रतिशत अधिक है और इसके साथ भारत के कुल एलएनजी आयात में ओमान की हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत दर्ज की गई। इस सूची में नाइजीरिया 3.51 लाख टन के साथ दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर रहा, जबकि पिछले महीने शीर्ष पर रहने वाला अमेरिका 59 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया। इसके अलावा, कतर की आपूर्ति में आई गिरावट का मुख्य कारण इस साल मार्च में रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमलों का प्रभाव माना जा रहा है।
घट गया भारत का कुल एलएनजी आयात, खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य विकल्पों पर जोर
सितंबर में भारत का कुल एलएनजी आयात अगस्त के 25 लाख टन से लगभग 14 प्रतिशत घटकर 21.7 लाख टन पर आ गया। प्राकृतिक गैस देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसका उपयोग उर्वरक उत्पादन, बिजली उत्पादन, औद्योगिक प्रक्रियाओं और शहरी परिवहन में बड़े पैमाने पर होता है। चूंकि भारत अपनी एलएनजी जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है और खाड़ी क्षेत्र के जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति पर क्षेत्रीय तनाव का खतरा रहता है, इसलिए सरकार अब कनाडा, अल्जीरिया, मोजाम्बिक और ब्राजील जैसे देशों से भी ऊर्जा खरीद को लगातार बढ़ा रही है।

