इंदौर:साइबर ठगी के बाद समय पर शिकायत करना छह लोगों के लिए राहत लेकर आया. अलग-अलग बहानों से मोबाइल में फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करवाकर ठगों ने इनके बैंक खातों से 4 लाख 90 हजार रुपए निकाल लिए थे. ठगी का पता चलते ही पीड़ितों ने साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की. क्राइम ब्रांच ने संबंधित बैंकों से समन्वय कर रकम के ट्रांजेक्शन फ्रीज करवाए और छहों पीड़ितों की पूरी राशि वापस करा दी.
ठगों ने किसी को ट्रैफिक चालान, किसी को बिजली बिल और बैंक केवाईसी अपडेट करने का झांसा दिया, जबकि एक मामले में भजन संध्या के नाम पर व्हाट्सऐप लिंक भेजा. लिंक खोलने के बाद एपीके फाइल डाउनलोड कराई गई. इसके जरिए ठगों ने मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कर दी. इनमें एक महिला एडवोकेट से मोबाइल अपडेट के नाम पर 1.30 लाख, एक व्यक्ति से ट्रैफिक चालान के नाम पर 45 हजार और दूसरे से बैंक केवाईसी के नाम पर 90 हजार रुपए ठगे गए. इसी तरह गेमिंग के नाम पर 95 हजार, बिजली बिल भुगतान के नाम पर 1.02 लाख और धार्मिक कार्यक्रम की एपीके भेजकर 28 हजार रुपए की ठगी की गई.
ठगी का अहसास होते ही सभी पीड़ितों ने साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की. शिकायत मिलने पर क्राइम ब्रांच की साइबर टीम ने लेनदेन की जानकारी जुटाई. संबंधित बैंकों और अन्य माध्यमों से समन्वय कर ठगी की रकम वाले ट्रांजेक्शन फ्रीज कराए. कार्रवाई के बाद 4.90 लाख रुपए छह पीड़ितों को वापस मिल गए. एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया का कहना है कि मोबाइल अपडेट, चालान, केवाईसी, बिजली बिल या किसी अन्य बहाने से भेजी जाने वाली एपीके फाइल को डाउनलोड न करें. साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करने से रकम वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है.
