भीलवाड़ा, (वार्ता) राजस्थान में भीलवाड़ा में नगर निगम चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस प्रत्याशियों के पार्टी चुनाव चिन्ह जमा नहीं हो पाने का विवाद अब भीलवाड़ा की चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस ने जहां इसे सत्ता के दुरुपयोग, लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार और राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय बताते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के आरोपों को उसकी गुटबाजी, आपसी खींचतान और संगठनात्मक विफलता से पैदा हुई चूक को छिपाने की कोशिश करार दिया है।
कांग्रेस नेताओं धीरज गुर्जर और पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने मामले को न्यायालय तक ले जाने और आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने साफ कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में नियम और समय-सीमा सभी के लिए समान हैं। नगर निगम के 70 वार्डों के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन था। कांग्रेस नेताओं के अनुसार प्रदेश समन्वयक, जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी दो बजकर 40 मिनट पर पार्टी का अधिकृत चुनाव चिन्ह लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में चिन्ह संबंधित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत भी कर दिए गए, लेकिन करीब 16 चिन्हों को लेकर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार शेष चिन्ह लेकर जब वे संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे तो निर्धारित समय समाप्त होने के कारण उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में विवाद बढ़ गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी।
शाम से लेकर देर रात तक इस मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत और विरोध का दौर चलता रहा। कांग्रेस की ओर से इसे महज तकनीकी या प्रक्रियागत मामला नहीं, बल्कि चुनावी अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया गया।
कांग्रेस के प्रदेश समन्वयक धीरज गुर्जर ने मामले को लेकर जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता निर्धारित पार्टी चुनाव चिन्ह लेकर समय रहते कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे, इसके बावजूद प्रत्याशियों के सिंबल स्वीकार नहीं किए गए।
गुर्जर ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि अधिकारी सरकार की कठपुतली बनकर काम न करें। उनके अनुसार किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का प्रयास लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी संभावित हार को देखते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। गुर्जर ने कहा कि यह केवल कांग्रेस का मामला नहीं है। आज किसी एक राजनीतिक दल के प्रत्याशी के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में किसी अन्य दल के साथ भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।
गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस पूरे मामले पर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस आंदोलन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगी।
उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थायी हैं। शासन और प्रशासन को किसी राजनीतिक दबाव में नहीं बल्कि संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए।
