
उन्होंने कहा, ” ज़्यादातर देखा गया है, भारत के लोग विदेशी वस्त्रों से ज़्यादा आकर्षित होते हैं, लेकिन विदेशी लोग भारत के वस्त्र से ज़्यादा आकर्षित होते हैं, क्योंकि मैं जब विदेश जाती हूं, वहां हम लोगों को अक्सर कहते हुए देखते हैं कि ‘यह आपकी साड़ी बहुत अच्छी है।’ तो इस दिशा को, इस चीज़ को ध्यान में रखना है कि उनकी सहूलियत से उनके पसंद के वस्त्र भी बनाना चाहिए, जो ख़ुशी-ख़ुशी वे भी पहनें।”
उन्होंने कहा, ” इस प्रयास में आप स्मरण रखें कि आपकी सोच वैश्विक हो, लेकिन आपकी जड़ें अपनी मिट्टी की विशिष्टता और जीवन मूल्यों से जुड़ी हों।
इस तरह वे न केवल सफल पेशेवर बनेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी अपना योगदान दे सकेंगे। आप विश्व स्तरीय उत्पाद और ब्रांड बनायें, लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि वे पर्यावरण अनुकूल हों। अपने उत्पादों के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल का प्रयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।” श्रीमती मुर्मु ने कहा कि बंगाल की कांथा कढ़ाई और बिहार की सुजनी देश में प्रचलित रीसाइक्लिंग परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
इन कलाओं की मूल भावना यही है कि जो बच गया, उसे बेकार समझकर फेंकना नहीं है, बल्कि नया रूप, नयी उपयोगिता और नये मूल्य देना है। मुझे बताया गया है कि निफ्ट के नीति निर्माताओं ने स्थायित्व और सामाजिक दायित्व को संस्थान की कार्य योजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि पिछले चार दशकों में निफ्ट ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक उल्लेखनीय कार्य किये हैं। संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों ने फ़ैशन के वैश्विक मंच पर तथा अंतरराष्ट्रीय फ़ैशन संस्थानों में अपनी पहचान बनायी है और देश का सम्मान बढ़ाया है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि निफ्ट के अनेक पेशेवराें ने फ़ैशन के क्षेत्र में भारतीय वस्त्र, शिल्प और डिज़ाइन परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अंग नहीं है, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आजीविका का भी आधार रहा है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि निफ्ट के विभिन्न केन्द्रों में अपने-अपने क्षेत्र के बुनकरों और शिल्पकारों को वस्त्र और परिधान क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराने तथा उनको बाज़ार से जोड़ने के लिए ‘क्राफ्ट क्लस्टर इनिशिएटिव’ जैसे कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। उनका मानना है कि पारंपरिक कारीगरों को ऐसे सहयोग एवं मार्गदर्शन मिलने चाहिए जिससे उनकी अगली पीढ़ी भी गर्व और विश्वास के साथ इस व्यवसाय से जुड़े रहे।
राष्ट्रपति ने निफ्ट स्नातक युवाओं से कहा कि उन्हें निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिला। नवाचार की कुशलता विकसित करने और नवीनतम टेक्नोलॉजी का सफल प्रयोग करने का प्रशिक्षण इस संस्थान ने उन्हें दिया है। उनकी कलात्मकता और रचनात्मकता को यहां एक नयी दिशा मिली है। उन्हें विश्वास है कि इस प्रक्रिया में वे भारत के वस्त्र, शिल्प और डिज़ाइन की समृद्ध और विविधतापूर्ण परंपरा से परिचित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब वे अपने ज्ञान और कौशल के बल पर इस समृद्ध विरासत को समकालीन बाज़ारों और नयी टेक्नोलॉजी में जोड़ने में अभिनव प्रयास करेंगे।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि वे ऐसे समय में फ़ैशन टेक्नोलॉजी के विभिन्न विधाओं के स्नातक बन रहे हैं, जब भारत आत्मनिर्भरता के अनेक आयामों पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
आज देश पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ विश्व पटल पर अपनी भूमिका को विस्तार दे रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि फ़ैशन प्रौद्योगिकी भी एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें विश्व स्तर पर भारत की भूमिका बढ़ाना बहुत संभव है। यहां उपस्थित युवाओं को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। वह आशा करती हैं कि अपने विभिन्न केन्द्रों के माध्यम से यह संस्थान वस्त्र और परिधान के क्षेत्र में ‘सतत भविष्य’ के अपने प्रयासों के अंतर्गत चक्रीय अर्थव्यवस्था की ऐसे विधाओं को व्यापक और लाभदायक बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्यों को हासिल करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज युवा पढ़-लिख कर केवल नौकरी के पीछे नहीं भागें बल्कि ‘रोजगार लेने वाले नहीं, बल्कि रोजगार प्रदाता ‘ बनें।” जितने भी फैशन डिज़ाइनर लड़कियां, विद्यार्थी यहां हैं, वे केवल अपने लिए, दूसरों के रोज़गार के लिए भी आप प्रयास कर रहे हैं और आगे भी इसी दिशा में ज़्यादा क्रांति के लिए प्रयास करेंगे। उन्हें एक ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र की प्रगति में योगदान करने के उचित अवसर मिल सकें।
