नई दिल्ली, भारत के आतंकवाद-रोधी ढांचे में महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मानेसर स्थित नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ट्रेनिंग एकेडमी ने एक ऐतिहासिक पहल की है। एकेडमी ने राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की महिला कर्मियों के लिए देश का पहला ‘महिला कमांडो कन्वर्ज़न कोर्स’ (MCCC) शुरू किया है, जो सोमवार 24 अगस्त से प्रभावी हो गया है। इस 12-हफ्ते के गहन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चुनिंदा महिला कर्मियों को शारीरिक रूप से मजबूत और आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
कठिन और एडवांस्ड ट्रेनिंग
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत महिला ट्रेनी को अत्यधिक कठिन शारीरिक ट्रेनिंग, एडवांस्ड हथियार चलाने और सटीक निशानेबाजी, टैक्टिकल इंटरवेंशन तथा बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने जैसे जटिल ऑपरेशन्स के गुर सिखाए जा रहे हैं। पारंपरिक रूप से पुरुष कमांडो के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में इस प्रकार की ट्रेनिंग का उद्देश्य सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना और विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर करना है।
सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मकसद केवल महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें जोखिम भरे मिशनों के लिए पेशेवर रूप से सक्षम बनाना है। कोर्स पूरा होने के बाद ये प्रशिक्षित महिला कमांडो अपने मूल बलों में लौटकर आतंकवाद-रोधी और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालेंगी। इससे देश के सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी और जटिल चुनौतियों से निपटने में महिला कमांडो की उपलब्धता व्यापक स्तर पर सुनिश्चित हो सकेगी।

