नई दिल्ली, आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के कनाडा स्थित फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ग्रुप द्वारा प्रस्तावित अधिग्रहण का विरोध अब चरम पर पहुंच गया है। बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की यूनियनों ने सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने तथा बैंक का नियंत्रण निजी हाथों में सौंपने के फैसले के विरोध में बैंक प्रबंधन को हड़ताल का नोटिस थमा दिया है। ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन और एम्प्लॉइज एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर आगामी 2 और 3 नवंबर 2026 को देश की सभी शाखाओं और कार्यालयों में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल आयोजित की जाएगी।
संसद में दिए गए आश्वासन का हवाला देकर 51% सरकारी हिस्सेदारी की मांग, कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा पर मांगा कानूनी आश्वासन
यूनियन नेताओं ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित बिक्री प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और सरकार खुले बाजार या एलआईसी से कम से कम 6 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदकर बैंक में अपनी न्यूनतम हिस्सेदारी 51 प्रतिशत सुनिश्चित करे। यूनियन का तर्क है कि इससे दिसंबर 2003 में संसद में दिए गए उस ऐतिहासिक आश्वासन का सम्मान होगा, जिसमें बैंक में बहुसंख्यक सरकारी नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई थी। इसके अलावा, यूनियन ने निजीकरण की स्थिति में मौजूदा कर्मचारियों, अधिकारियों और संविदा कर्मियों की नौकरी, पेंशन लाभ, आरक्षण नीतियों और मौजूदा सेवा शर्तों की लिखित तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी सुरक्षा की मांग रखी है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्थानांतरण का विकल्प देने की मांग, निजीकरण से जमाकर्ताओं, किसानों और छोटे कर्जदारों पर पड़ेगा बुरा असर
विरोध दर्ज कराते हुए यूनियन ने चिंता जताई कि बैंक के लगातार लाभ में होने के बावजूद निजीकरण से इसका जनहितकारी स्वरूप समाप्त हो जाएगा। उन्होंने मांग की है कि बिक्री आगे बढ़ने की स्थिति में कर्मचारियों को अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्थानांतरित होने का विकल्प दिया जाए, जहां उनकी वरिष्ठता और वेतनमान सुरक्षित रहें। यूनियन ने सचेत किया है कि निजीकरण से देश के जमाकर्ताओं, किसानों और छोटे कर्जदारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यदि सरकार ने बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा बड़ा कदम उठाया जाएगा।

