
इंदौर. बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी हालिया फायरिंग की घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक बार फिर चर्चा में है. मालवा-निमाड़ में भी इस गैंग के नाम पर कारोबारियों को धमकाने और करोड़ों रुपए की रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं. इंदौर में कारोबारियों को धमकियां मिलीं, महू में अस्पताल संचालक के बेटे से पांच करोड़ रुपए मांगे गए, जबकि खरगोन में कारोबारी के घर फायरिंग के बाद 10 करोड़ रुपए की मांग की गई. इन घटनाओं में पुलिस ने कार्रवाई की है. जांच का अहम पहलू यह भी है कि धमकी देने वालों का गैंग से वास्तव में कोई संबंध था या उन्होंने उसके नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने और वसूली की कोशिश की.
इंदौर में रियल एस्टेट कारोबारी संजय जैन को मार्च में फोन कर पहले 10 करोड़ और बाद में 15 करोड़ रुपए देने की धमकी दी गई थी. कॉल करने वाले ने कथित तौर पर लॉरेंस गैंग से जुड़ा होने का दावा किया था. इससे पहले बिल्डर विवेक दम्मानी से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगे जाने का मामला भी सामने आया था। धमकी देने वाले ने उनके बेटे को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी. मामले में क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की थी. महू में एक निजी अस्पताल संचालक के बेटे को फोन कर पांच करोड़ रुपए मांगे गए थे. शिकायत के बाद पुलिस ने कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है. इस मामले में भी पुलिस यह पता लगाने में जुटी थी कि धमकी देने वाले का गैंग से कोई वास्तविक संबंध है या उसके नाम का इस्तेमाल किया था. वहीं खरगोन जिले के कसरावद थाना क्षेत्र के भीलगांव में जैविक कपास कारोबारी दिलीप राठौर के घर पर गोलीबारी के बाद परिवार से 10 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई थी. पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जांच के दौरान स्थानीय लोगों की भूमिका और गैंग के नाम पर रंगदारी मांगने के नेटवर्क की पड़ताल की गई. लगातार सामने आए मामलों के बाद प्रदेश पुलिस ने इंदौर, खरगोन, भोपाल और अशोकनगर में कारोबारियों को मिली धमकियों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर जांच की जा रही है. जांच में ऐसे स्थानीय लोगों की भूमिका भी देखी गई, जिन पर कारोबारियों की संपत्ति, कार्यालय और गतिविधियों की जानकारी जुटाकर आगे पहुंचाने का आरोप था. पुलिस की पड़ताल का एक अहम पहलू यह रहा कि धमकी देने वालों के गैंग से वास्तविक संबंध थे या वे उसके नाम और दहशत का इस्तेमाल कर रंगदारी वसूलना चाहते थे. टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटना ने एक बार फिर संगठित अपराधियों के नाम पर दी जाने वाली धमकियों को लेकर चिंता बढ़ाई है. हालांकि, किसी घटना में गैंग का नाम सामने आने और उसके वास्तविक सदस्यों की संलिप्तता साबित होने के बीच अंतर है. मालवा-निमाड़ के मामलों में भी आरोपियों की भूमिका और गैंग से उनके संबंधों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी.
