डोमा परिसंघ का ऐलान 13 दिसंबर को रामलीला मैदान में होगी संविधान बचाओ रैली 

नई दिल्ली। दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (डोमा परिसंघ) ने 13 दिसंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल ‘संविधान बचाओ रैली’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। रविवार को नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में आयोजित परिसंघ के राष्ट्रीय सम्मेलन में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। सम्मेलन में 20 राज्यों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन एवं पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने कहा कि बहुजन समाज के आंदोलन में जातिगत बिखराव के कारण सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि फुले, शाहू और अंबेडकर के नाम पर आंदोलन चलाने वाले कई नेताओं ने सत्ता हासिल करने के लिए अपनी-अपनी जातियों को गोलबंद किया, जिससे बहुजन एकता मजबूत होने के बजाय कमजोर हुई।

डॉ. उदित राज ने संविधान की रक्षा के लिए दलितों, ओबीसी, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब युवा, विद्यार्थी, वकील और नागरिक समाज संविधान बचाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, तब उन वर्गों को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए, जिन्हें संविधान से सबसे अधिक अधिकार मिले हैं।

सम्मेलन में वक्ताओं ने संविधान और लोकतंत्र पर बढ़ते खतरों को लेकर चिंता जताई। साथ ही दलितों और अल्पसंख्यकों के वोट बड़े पैमाने पर काटे जाने के आरोपों पर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने ओबीसी की जातिगत जनगणना होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया।

एफसीआरए (FCRA) संशोधन को लेकर भी सम्मेलन में विरोध जताया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इस संशोधन के जरिए अल्पसंख्यक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और आरएसएस ईसाई तथा मुस्लिम संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। इसके विरोध में देश और विदेश में जनजागरण अभियान चलाने तथा आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।

डॉ. उदित राज ने कहा कि अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। जातियों में बंटने के बजाय एकजुट होकर सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए निर्णायक जनआंदोलन को जरूरी बताया।

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