Inflation Increases Burden On Public: मुंबई, देश में त्योहारों से पहले महंगाई बढ़ने से जनता पर बोझ बढ़ गया है। महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण वैश्विक उथल-पुथल और देश में हो रहा प्रोटेस्ट है।
- त्योहरों से पहले महंगाई बढ़ने से जनता परेशान
- व्यापारी कर रहे 3 हजार करोड़ के घाटे का दावा
- दिल्ली में हो रहे प्रोटेस्ट से आम-जनता को रही समस्या
त्योहारों का मौसम आ चुका है लेकिन इस बार महंगाई और प्रदर्शन के कारण व्यापारी और आमजनजीवन बेहद प्रभावित है। व्यापारियों का दावा है कि प्रदर्शन के कारण करीब 3 हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। ऐसे में इस घाटे का बोझ आम-जनता के कंधों तक पहुंचना लाजमी है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पहले से मार्केट में महंगाई का असर देखने को मिल रहा है। ऊपर से प्रदर्शन के कारण स्थिति और बिगड़ती दिख रही है।
खाने-पीने की वस्तुओं, सब्जियों, फल, मिठाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च त्योहारों के दौरान परिवारों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है। ऐसे में लोगों को त्योहार की तैयारियों और जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
त्योहारों के समय घरों में खाद्य सामग्री, कपड़े, उपहार और सजावट से जुड़ी खरीदारी बढ़ जाती है। वहीं, जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर सीमित आय वाले परिवारों के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है। इसका असर सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों की बचत और दूसरे जरूरी खर्चों की योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
मिठाई के दामों में वृद्धि से फिकी हुई मिठास
इस बार चीनी के दाम 60 पार है जबकि दूध के दामों में 30 फिसदी की बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। बात करें मिठाई के दामों का तो प्रतिकिलों 50 से 60 रुपये दाम बढ़े है। महंगाई का असर सभी परिवारों पर एक जैसा नहीं होता। यह उनकी आय, खर्च करने की क्षमता और स्थानीय बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर निर्भर करता है। कुछ लोग त्योहारों की खरीदारी पहले से तय बजट के अनुसार कर रहे हैं, जबकि कई परिवार गैर-जरूरी खर्चों में कटौती को प्राथमिकता दे सकते हैं।
ऐसे माहौल में उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे खरीदारी से पहले बजट तय करें, अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करें और जरूरत के मुताबिक ही सामान खरीदें। वहीं, बाजार में उचित मूल्य पर वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर निगरानी भी महत्वपूर्ण है।
प्रोटेस्ट ने बढ़ाई महंगाई?
जब किसी देश या क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन या आंदोलन होते हैं, तो उसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है और महंगाई तेजी से बढ़ती है। राजधानी दिल्ली अक्टूबर की शुरूआत से ही प्रदर्शन की चपेट में है। इसका सीधा प्रभाव जनता की जेब पर पड़ रहा है। वस्तुओं का आवागमन प्रभावित होने से सप्लाई चैन टूटा है। फैक्ट्रियां बंद रही है। लागातार घंटों जाम में परिवहन शुल्क बढ़ा है। नियमित दुकानें न खुल पाने के कारण वस्तुओं के दाम भी बढ़े है। ऐसे में प्रोटेस्ट ने आम-जनता के जेब पर भारी बोझ डाला है।
व्यापारियों को हजार करोड़ का घाटा
देश की राजधानी दिल्ली अक्टूबर की शुरूआत से ही प्रदर्शन की चपेट में है। इसका सीधा प्रभाव जनता के साथ-साथ व्यापारियों पर भी देखने को मिल रहा है। चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अनुसार, दिल्ली में लगातार चल रहे धरने और विरोध प्रदर्शनों के कारण अक्टूबर महीने में व्यापारियों को 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। व्यापारियों का दावा है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो दिवाली तक यह घाटा 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
