विशेष संवाददाता भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुखी और जन-केंद्रित बनाने के लिए शोध एवं साक्ष्य आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत प्रैकडेमिक एक्शन रिसर्च इनिशिएटिव विद मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच लैब पहल के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम, महिला सुरक्षा, जन-जागरूकता अभियानों और पुलिस की तकनीकी प्रणालियों की प्रभावशीलता का अध्ययन किया जा रहा है।
प्रैकडेमिक एक्शन रिसर्च इनिशिएटिव विद मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच लैब के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस की रणनीतियों, प्रशिक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा तय की जाएगी।
यूएनएफपीए और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के सहयोग से नातरा-झगड़ा जैसी सामाजिक कुप्रथाओं की रोकथाम के लिए शोध किया जा रहा है। इसमें इन प्रथाओं के पीछे मौजूद सामाजिक कारणों और समुदाय की भागीदारी का अध्ययन किया जाएगा।
वहीं, न्यूयॉर्क की सिटी यूनिवर्सिटी के जॉन जे कॉलेज ऑफ क्रिमिनल जस्टिस के सहयोग से भोपाल में छात्राओं के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न और पीछा करने जैसी घटनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे अपराधों के कारणों की पहचान कर व्यावहारिक रोकथाम के उपाय विकसित करना है।
पुलिस के ‘सेफ क्लिक’ साइबर जागरूकता अभियान और ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा। इसके अलावा एनएएफआईएस, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस और डायल-112 जैसी तकनीकी प्रणालियों पर शैक्षणिक संस्थानों, जिनमें मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) भी शामिल है, के सहयोग से अध्ययन प्रस्तावित हैं।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत पुलिस अधिकारियों की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं, समन्वय और प्रशिक्षण जरूरतों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण भी किया जाएगा।
इस संबंध में आयोजित बैठक में पुलिस महानिरीक्षक डॉ. आशीष और उप पुलिस महानिरीक्षक रियाज इकबाल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
