सीएम के आश्वासन के बाद थमा आदिवासियों का आंदोलन

सीहोर। कोसमी में वन विकास निगम की कार्रवाई के विरोध में न्याय की गुहार लेकर भोपाल सीएम हाउस की ओर निकले 3200 आदिवासियों का आंदोलन पहले पड़ाव कोनाझिर में ही समाप्त हो गया. गुरुवार रात करीब 9 बजे 42 किलोमीटर पैदल चलकर कोनाझिर पहुंचे आदिवासियों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद राहत मिली. देर रात भोपाल से लौटा 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जब मुख्यमंत्री का संदेश लेकर पहुंचा, तो आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया गया. जिला प्रशासन ने बसों की व्यवस्था कर आदिवासियों को उनके गांवों के लिए रवाना किया.

उल्लेखनीय है कि बुधनी क्षेत्र के ग्राम कोसमी में वन विकास निगम द्वारा रविवार को 12 आदिवासियों के मकान तोड़े जाने और बेदखली की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में आदिवासी गुरुवार को पैदल भोपाल के लिए निकले थे. उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्या बताना और न्याय की मांग करना था. पहले दिन 42 किलोमीटर की यात्रा के बाद इछावर क्षेत्र के कोनाझिर में उनका पड़ाव रहा. आंदोलनकारियों के साथ 16 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 18 पिकअप वाहन भी थे. इनमें राशन, गैस सिलेंडर, खाना बनाने के बर्तन और रात गुजारने के लिए जरूरी सामान रखा गया था.

आदिवासियों की मांगों पर गुरुवार रात मुख्यमंत्री निवास पर 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक शुरू हुई. इसमें आदिवासी समाज के 12 प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुनाथ सिंह भाटी व रवि मालवीय शामिल हुए. बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे. प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासियों का पक्ष रखते हुए कहा कि वे दशकों से संबंधित जमीन पर खेती करते आ रहे हैं. अपने दावे के समर्थन में उन्होंने वर्ष 2000 और 2005 से लगातार काटी गई जुर्माने की रसीदें भी प्रस्तुत कीं. सभी पक्षों को सुनने के बाद रात करीब 10.30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी आदिवासी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कोनाझिर के लिए रवाना हुआ.

देर रात करीब 12.30 बजे प्रतिनिधिमंडल कोनाझिर पहुंचा. यहां कलेक्टर बालागुरु के. और एसपी सोनाक्षी सक्सेना सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे. भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश बारेला ने स्थानीय भाषा में आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री के आश्वासन की जानकारी दी. विधायक रमाकांत भार्गव ने भी प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से हुई चर्चा का हवाला देते हुए बताया कि जांच का भरोसा मिला है. इसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी गई.

प्रशासन ने रात में ही जुटाई 16 बसें

आंदोलन समाप्त होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती हजारों लोगों की घर वापसी की थी. पैदल यात्रा पर निकले आदिवासियों के पास लौटने के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे. ऐसे में जिला प्रशासन ने तत्काल 16 बसों की व्यवस्था की. देर रात सभी आंदोलनकारियों को बसों से उनके गांवों के लिए रवाना किया गया. मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन तो समाप्त हो गया, लेकिन अब सबकी निगाहें कोसमी मामले की प्रस्तावित निष्पक्ष जांच और उसके नतीजों पर टिकी हैं.

 

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