दादर पश्चिम के भवानी शंकर रोड स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) संचालित मुंबई पब्लिक स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “यह भारत है, पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका या नेपाल नहीं। उनके पास भारत रत्न डॉ बाबासाहेब अंबेडकर का बनाया संविधान नहीं है।”
उन्होंने कहा, “जब तक हमारे पास यह संविधान है, फैसले संसद ही करेगी। पिछले कुछ वर्षों में संविधान और लोकतंत्र पर हमला करने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन हमारा संविधान इतना मजबूत है कि कोई भारत के लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचा सका।”
श्री फडणवीस ने कहा, “जो लोग पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसे हालात पैदा करने का इरादा रखते हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए। इस देश में संविधान ने हर किसी को न्याय पाने का अधिकार दिया है। यदि कोई असंवैधानिक रास्ता अपनाता है तो उससे निपटने के उपाय भी संविधान में दर्ज हैं।”
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के उन बयानों पर हमला बोला था, जिनमें उन्होंने बंगलादेश के राजनीतिक घटनाक्रम से प्रेरित होने का दावा किया था।
श्री फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी माना है कि संविधान गीता, बाइबल और कुरान से भी बढ़कर है। उन्होंने कहा, “हमारा देश हजार वर्षों तक इसलिए गुलाम रहा, क्योंकि हम सामाजिक मूल्यों को भूल गये थे, जिससे असमानता फैली। लेकिन संविधान ने समानता स्थापित की है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि अवसरों की बराबरी लाने वाला आधार है। इतने बड़े देश में, जहां कई जातियां, धर्म और क्षेत्र हैं, संविधान ने सबको एक साथ काम करने का रास्ता दिखाया है।”
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई की उपस्थिति में स्कूली छात्रों के लिए ‘स्मार्ट सिटीजन’ और ‘स्टूडेंट इंस्पिरेशन’ नामक दो मराठी पुस्तिकाओं का विमोचन किया।
कार्यक्रम में श्री फडणवीस और न्यायमूर्ति गवई ने पुस्तिकाओं के पाठ समझाये तथा छात्रों से सीधा संवाद भी किया। इस पहल का उद्देश्य बीएमसी संचालित विद्यालयों में कक्षा एक से 10वीं तक के छात्रों में संवैधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाना है।
बीएमसी के अनुसार, यह कार्यक्रम केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित न रहकर गतिविधियों, परियोजनाओं और चर्चाओं के माध्यम से छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करेगा।
