दिलीप सिंह
झाबुआ: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और धार जिलों में अवैध नशे के कारोबार को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है। इन क्षेत्रों में अवैध शराब, सफेद पाउडर और गांजे के कारोबार से जुड़े मामले सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इन अवैध गतिविधियों में लोगों को कौन शामिल कर रहा है, नशीले पदार्थों की आपूर्ति कौन कर रहा है और इन्हें खरीदने वाले कौन हैं? इन सवालों के जवाब अब भी स्पष्ट नहीं हैं।
पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग समय-समय पर अवैध नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज कर रहे हैं। हालांकि, इस कारोबार के पीछे सक्रिय लोगों और पूरे नेटवर्क का पता लगाना भी जरूरी है। सवाल यह है कि स्थानीय लोगों को इस अवैध कारोबार से जोड़ने वाले लोग कौन हैं और इस नेटवर्क को बढ़ावा कैसे मिल रहा है।
हाल ही में अलीराजपुर जिले में पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए गांजे के लगभग 2,400 से अधिक पौधे बरामद किए थे। इनकी अनुमानित बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। पुलिस ने करीब 5 से 6 हेक्टेयर क्षेत्र में गांजे की खेती करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया गया कि कपास की फसल के बीच गांजे की खेती की जा रही थी।
इसी तरह झाबुआ और धार जिलों में भी पुलिस ने हाल के दिनों में गांजे की खेती के खिलाफ कार्रवाई करते हुए हजारों पौधे जब्त किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि जिले के कुछ गांवों में कपास के खेतों के बीच गांजे की खेती की जा रही है। इसके बाद पुलिस ने झाबुआ जिले के पारा क्षेत्र के कलमोड़ा गांव में दबिश दी। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को एक के बाद एक कई खेतों में गांजे के पौधे मिले।
सर्च अभियान के दौरान पुलिस टीम आगे बढ़ते हुए धार जिले की सीमा तक पहुंच गई। इसके बाद झाबुआ पुलिस ने धार जिले की पुलिस से संपर्क किया। कार्रवाई के दौरान झाबुआ पुलिस ने करीब 20 हजार गांजे के पौधे जब्त किए, जबकि धार जिले की पुलिस ने लगभग 3 हजार पौधे बरामद किए। धार पुलिस के अनुसार, करीब 1,500 किलोग्राम गांजा निकाला जा चुका है। निकाले गए गांजे की बाजार कीमत का आकलन किया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने आदिवासी डूंगरसिंह और उनके बेटों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि कपास की फसल की आड़ में गांजे की खेती की जा रही थी, जिससे सामान्य निरीक्षण के दौरान इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
इन आदिवासी बहुल जिलों में अब तक अवैध शराब की बरामदगी से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, कथित तौर पर सफेद पाउडर से जुड़े मामलों में भी पुलिस कई बार युवकों को पकड़ चुकी है। अब गांजे की खेती के मामले सामने आने से क्षेत्र में अवैध नशे के कारोबार के विस्तार को लेकर चिंता बढ़ रही है।
झाबुआ, अलीराजपुर और धार जिलों में अवैध नशे के कारोबार का बढ़ना सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर चुनौती बन सकता है। इन जिलों की सीमाएं गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से लगती हैं, ऐसे में अवैध नशीले पदार्थों की आपूर्ति और उनके परिवहन की आशंका की भी जांच जरूरी है।
ऐसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग को निगरानी तंत्र मजबूत करने, नशीले पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जांच करने तथा अवैध कारोबार के मुख्य संचालकों तक पहुंचने की आवश्यकता है। साथ ही, स्थानीय युवाओं को इस तरह की गतिविधियों से दूर रखने के लिए जागरूकता और रोकथाम के प्रयास भी जरूरी हैं, ताकि आदिवासी अंचलों में कानून-व्यवस्था और सामाजिक वातावरण सुरक्षित बना रहे।
