मुंबई, 16 अक्टूबर (वार्ता) शिवसेना (यूबीटी) नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि देश में संवैधानिक संस्थाएं सरकार के भारी दबाव में काम कर रही हैं।
श्री राउत ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधने के लिए ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नागरिकों के अधिकारों का बचाव करने के साथ ही मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने पर गंभीर चिंता जतायी। राष्ट्रीय तिरंगा फहराने के मामले में कार्यकर्ताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के खिलाफ हाल में की गई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए हुए उन्होंने कहा कि सरकार को तिरंगा फहराने से आपत्ति क्यों है। उन्होंने कहा, “1947 के बाद आरएसएस ने करीब 40 से 45 वर्षों तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया। उनके लिए तिरंगा फहराना अपराध हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह गर्व और सम्मान की बात है। यदि सीजेपी ने तिरंगा फहराया, तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पुलिस इतने नाराज क्यों हैं?”
निर्वाचन आयोग पर सीधे आरोप लगाते हुए राज्यसभा सदस्य ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘एजेंट’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटा दिये गये।
श्री राउत ने कहा, “मृत लोग भाजपा की ओर से मतदान कर रहे हैं, जबकि लाखों जीवित मतदाताओं को धोखाधड़ी से सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। विपक्षी नेता आदित्य ठाकरे और श्री राहुल गांधी ने इस बड़े पैमाने पर हो रही धांधली का पर्दाफाश किया है। मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि मतदाता सूचियों में हेरफेर करना ‘शुद्धीकरण’ नहीं है। उन्हें निर्वाचन आयोग के साथ घरेलू नौकर जैसा व्यवहार करना बंद कर देना चाहिए।”
हाल में न्यायपालिका की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि सरकार के अधिकारों के दुरुपयोग के खिलाफ संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करने में उच्चतम न्यायालय सबसे प्रमुख सुरक्षा कवच है। न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्होंने उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन की ओर से उजागर किए गए बयानों के बाद शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगी।
उन्होंने कहा, “हम उच्चतम न्यायालय का दरवाजा इसलिए खटखटा रहे हैं, क्योंकि यह लाखों पीड़ित नागरिकों की आवाज है। हमारी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में साढ़े चार साल तक संघर्ष करने और चार मुख्य न्यायाधीशों के कार्यकाल बदलने के बावजूद अंतिम फैसला नहीं आने के बाद भी हमें पूरा विश्वास है कि न्याय मिलेगा।”
श्री राउत ने न्यायपालिका से अदालत को कथित तौर पर दी जा रही धमकियों का संज्ञान लेने की भी अपील की। उन्होंने दावा किया कि श्री शाह की ओर से बनाए जा रहे दबाव के कारण देश की संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में व्यापक अव्यवस्था पैदा हो रही है।
