येरेवन (आर्मेनिया), 16 अक्टूबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को दुनिया भर के नेताओं से
प्रकृति की रक्षा के लिए तत्काल और बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने का आह्वान किया। वह यहां चल रहे संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (कोप 17) के तहत आयोजित ‘लीडर्स फॉर नेचर’ शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
श्री गुटेरेस ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदूषण, जैव विविधता के नुकसान और जलवायु परिवर्तन के कारण 10 लाख से
अधिक प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं, जिससे यह दुनिया रहने योग्य नहीं रह जाएगी। उन्होंने चार साल पहले मॉन्ट्रियल
में हुए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि 2030 के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति काफी धीमी और असमान है। मौजूदा प्रतिबद्धताओं के पूरे होने पर भी 2030 तक केवल 26 प्रतिशत स्थलीय और 12 प्रतिशत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र ही संरक्षित हो पाएंगे। यह मॉन्ट्रियल में किए 30 प्रतिशत भूमि और समुद्र को संरक्षित करने के वादे से काफी कम है। इसके अलावा, हानिकारक प्रोत्साहनों को कम करने से जुड़े आर्थिक लक्ष्यों में बड़े अंतर हैं, और हालिया ओईसीडी रिपोर्ट के अनुसार जैव विविधता वित्तपोषण 200 अरब डॉलर के सहमत लक्ष्य के आधे से भी कम है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बहुत ज्यादा चराई और अत्यधिक मछली पकड़ने के साथ-साथ उर्वरकों, कीटनाशकों, प्लास्टिक और भारी धातुओं का बहुत अधिक उपयोग मिलकर प्रदूषण, जैव विविधता के नुकसान और जलवायु संकट के तिहरे वैश्विक संकट को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान में 10 लाख से अधिक प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं, जो हमें रहने योग्य न रहने वाली दुनिया की ओर धकेल रही हैं।
श्री गुटेरेस ने कहा कि ’30वाई30′ का लक्ष्य विज्ञान की स्वीकारोक्ति और बहुपक्षवाद में विश्वास का प्रतीक है। यह ओजोन परत के छेद को ठीक करने वाले मॉन्ट्रियल समझौते की तरह मानव इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक उपलब्धियों में से एक बन सकता है। गौरतलब है कि ’30वाई30′ लक्ष्य का आशय वर्ष 2030 तक पृथ्वी की कम से कम 30 प्रतिशत भूमि, अंतर्देशीय जल और महासागरों का प्रभावी ढंग से संरक्षण और प्रबंधन से है।
उन्होंने सरकारों से शून्य-अपशिष्ट और चक्रीय अर्थव्यवस्था , टिकाऊ कृषि, निगरानी और पारदर्शिता अपनाने तथा मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने ‘येरेवन घोषणापत्र’ का स्वागत किया। इस घोषणापत्र में सरकारी फैसले, नीति, बजट और विनियमन में जैव विविधता को शामिल करने का संकल्प लेने की बात कही गयी है।
श्री गुटेरेस ने कहा कि प्रकृति की रक्षा में निवेश किए गए प्रत्येक एक डॉलर के मुकाबले उसे नष्ट करने पर 30 डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। वर्ष 2023 में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों, जैसे प्रदूषणकारी भारी उद्योगों, भूमि को नष्ट करने वाले कृषि-व्यवसायों और जीवाश्म ईंधन में 7.3 लाख करोड़ डॉलर का प्रवाह हुआ। उन्होंने जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को तुरंत खत्म करने की मांग करते हुए कहा कि तीनों रियो सम्मेलनों के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश को 2030 तक सालाना 571 अरब डॉलर या वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का केवल आधा प्रतिशत तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने निजी क्षेत्र से ‘कैली फंड’ में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश अब जीवाश्म ईंधन की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है। विकासशील देशों के लिए सेविले प्रतिबद्धता के जरिए वित्तीय वादों को पूरा करने और वैश्विक वित्तीय वास्तुकला में सुधार की बात भी कही। कैली फंड में जमा राशि आनुवंशिक संसाधनों की डिजिटल अनुक्रम जानकारी के व्यावसायिक उपयोग से मिलने वाले लाभों का न्यायसंगत बंटवारा किया जाना है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि पर्यावरणीय गिरावट का सबसे भारी प्रभाव सबसे कमजोर वर्गों पर पड़ता है, जिन्होंने इस समस्या को पैदा करने में सबसे कम भूमिका निभाई है। इसलिए युवाओं के नवाचार, नागरिक समाज की ऊर्जा, महिलाओं की भागीदारी और विशेष रूप से स्वदेशी लोगों तथा स्थानीय समुदायों के नेतृत्व की आवश्यकता है। स्वदेशी ज्ञान को केंद्र में रखकर हम ‘पैतृक बुद्धिमत्ता’ का उपयोग कर सकते हैं, जो मानव को पृथ्वी, समुद्र और आकाश के साथ फिर से जोड़ सकती है।
अपने कार्यकाल में केवल 76 दिन शेष रहने का उल्लेख करते हुए श्री गुटेरेस ने कहा कि महासचिव के रूप में अपने एक दशक के कार्यकाल में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान और प्रदूषण के तिहरे संकट से लड़ना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है, क्योंकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति की रक्षा के लिए हम पर भरोसा कर रही हैं। उन्होंने सभी
से प्रकृति के संरक्षक बनने और तत्काल कदम उठाने की अपील की।

