भोपाल: क्या आपने कभी सोचा है कि पहले जहाँ दोपहिया वाहन सिर्फ धनतेरस या शादियों के सीजन में खरीदे जाते थे, वहीं आज हर महीने शोरूम्स में भीड़ क्यों लगी रहती है? क्या दोपहिया वाहन खरीदना अब सिर्फ एक ‘शगुन’ या परंपरा रह गया है, या फिर यह आज के समय की सबसे बड़ी मजबूरी और जरूरत बन चुका है? आइए पड़ताल करते हैं इस बदलते ट्रेंड की।”
“ऑटो मार्केट के जानकारों की मानें तो पिछले कुछ सालों में खरीददारी के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग सालभर इस बात का इंतजार नहीं करते कि कोई बड़ा त्योहार आएगा तभी गाड़ी घर लाएंगे। जॉब माइग्रेशन, बढ़ते प्रोफेशनल टारगेट्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की परेशानियों ने दोपहिया वाहन को हर घर की सबसे बड़ी प्राथमिकता बना दिया है।”
“तो साफ है, शगुन और परंपरा के मायने अपनी जगह हैं, पर आधुनिक जीवनशैली की जरूरतों ने दोपहिया वाहन खरीदने के इस पूरे परिदृश्य को ही बदलकर रख दिया है।
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