प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम पहुंची कोल माइंस

सिंगरौली: काचन नदी में कोयला खदान से निकलने वाला पानी छोड़े जाने की शिकायत पर आज गुरुवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी द्वारा गठित जांच दल टीएचडीसी कोल माइंस पहुंचा। टीम ने मौके पर पहुंचकर पानी की स्थिति का निरीक्षण किया।जांच के दौरान मौजूदा समय में पानी में कोयला दिखाई नहीं दिया, लेकिन नदी के आसपास किनारों पर कोयले की परतें जमी मिलीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि नदी में कोयला युक्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा, तो किनारों पर कोयले की परतें कैसे जमा हुईं, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने कंपनी को नोटिस जारी करने की बात कही है।

ग्राम पंचायत पिड़रवाह के सरपंच सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि टीएचडीसी कोल माइंस से निकलने वाला पानी काचन नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी का पानी दूषित होने और उसके सेवन से ग्रामीणों तथा मवेशियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। इस मामले को नवभारत ने प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। किंतु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मौके पर ठीक ठाक पाया है। जबकि काचन नदी में कई जगह कोयले की परते दिखाई दे रही हैं। इनकी नजरें अचानक ओझल कैसे हो गई, यह भी अपने आप में सवाल किये जा रहे हैं। जबकि 15 दिन पहले बारिश हो रही थी और नाले भी उफान पर थे। यहां बताना उचित होगा कि बारिश के दौरान कोयले की परते बाढ़ के दौरान बह गये होंगे, माना जा रहा है कि कोयले की परते हाल ही के दिनों की हैं। भले ही प्रदूषण विभाग हरी झंडी देकर महज खानापूर्ति करने में जुटा है, ऐसा आरोप ग्रामीण द्वारा लगाया जा रहा है।
पानी निकासी की व्यवस्था पर सवाल
प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी की ओर से पानी निकासी के संबंध में अवसादन तालाब तथा अन्य प्राकृतिक जल निकासी नालों का उल्लेख किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि खदान से निकलने वाला पानी वास्तव में कहां छोड़ा जा रहा है, यदि पानी निर्धारित व्यवस्था के तहत निकाला जा रहा है, तो इसकी पुष्टि स्थल निरीक्षण, जल नमूनों की जांच और निकासी मार्गों की पड़ताल से होनी चाहिए। वहीं कोल माइंस के आसपास प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा गंभीर विषय है। ऐसे में केवल नोटिस जारी करने की बात पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। ग्रामीणों की शिकायतों, नदी किनारे मिली कोयले की परतों और पानी निकासी के वास्तविक मार्ग की निष्पक्ष जांच जरूरी है। कंपनी को बचाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल निगाहें प्रदूषण नियंत्रण विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
इनका कहना:-
डीएचडीसी माइंस का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान काचन मुंडा नाला में कोलयुक्त पानी बहता नही पाया गया है। परंतु कुछ समय पूर्व नाले में कोलयुक्त पानी के निशान अवलोकित किये गये हैं। इस संबंध में कोल माइंस प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया जावेगा।
रतिपाल ठाकुर
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, सिंगरौली

Next Post

चीनी, चावल कड़क, गेहूं नरम, दालों और खाद्य तेलों में घट बढ़

Thu Oct 15 , 2026
नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (वार्ता) घरेलू थोक जिंस बाजारों में गुरुवार को चीनी की कीमतों में तेजी का क्रम जारी रहा। चीनी के साथ चावल का भाव भी चढ़ गया। गेहूं के भाव गिरावट रही जबकि खाद्य तेलों में घट बढ़ रही। मीठे के थोक बाजार में चीनी की औसत […]

You May Like

Play sound