एल्यूमीनियम के बर्तनों के गुणवत्ता मानकों में केंद्र ने की सख्ती, पेय पदार्थों के केन के लिए अप्रैल 2027 की समय-सीमा तय

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (वार्ता) केंद्र सरकार ने ढले हुए एल्यूमीनियम के बर्तनों के लिए अनिवार्य गुणवत्ता प्रमाणन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके साथ ही एल्युमीनियम के पेय पदार्थों (बेवरेज) के केन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानदंडों को पूरा करने की अंतिम तिथि एक अप्रैल 2027 तय की है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए इन नियमों के पालन की समय-सीमा चरणबद्ध तरीके से रखी गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने इस वर्ष जारी पिछले आदेश के स्थान पर ‘खाद्य और पेय पदार्थों के कुकवेयर, बर्तन और केन (गुणवत्ता नियंत्रण) दूसरा आदेश, 2026’ अधिसूचित किया है।

13 अक्टूबर को अधिसूचित नए नियमों के अनुसार, ढले हुए एल्युमीनियम के बर्तनों को भारतीय मानक आईएस 1660:2024 और एल्युमीनियम के पेय पदार्थों के केन को आईएस 14407:2023 के अनुरूप होना अनिवार्य है। इस आदेश के दायरे में आने वाले उत्पादों पर वैध लाइसेंस के तहत निर्धारित बीआईएस मानक चिह्न होना अनिवार्य होगा।
ढले हुए एल्युमीनियम बर्तनों के लिए प्रमाणन की अनिवार्यता सभी श्रेणियों के निर्माताओं पर तत्काल लागू हो गई है, जबकि सरकार ने पेय पदार्थों के केन निर्माताओं को नियमों के क्रियान्वयन के लिए छूट का समय दिया है।
माइक्रो और लघु उद्योगों को छोड़कर बड़े और अन्य निर्माताओं को एक अप्रैल 2027 से केन के मानकों का पालन करना होगा। लघु उद्योगों के लिए यह समय-सीमा एक जुलाई 2027 और माइक्रो उद्योगों के लिए एक अक्टूबर 2027 तक बढ़ाई गई है।

यह आदेश बीआईएस के साथ परामर्श के बाद भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत जारी किया गया है। सरकार ने कहा कि सार्वजनिक हित में यह कदम उठाना आवश्यक और व्यावहारिक समझा गया है। संशोधित नियमों में उन पात्र निर्माताओं और आयातकों को राहत दी गई है, जिनके पास अनुपालन की अंतिम तिथि से पहले उत्पादित या आयातित स्टॉक मौजूद है।

ऐसे व्यवसायी संबंधित क्रियान्वयन तिथि के बाद छह महीने तक घोषित पुराने स्टॉक को बेचने, प्रदर्शित करने या बिक्री के लिए पेश करने का काम जारी रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें चाटर्ड अकाउंटेंट (सीए) से प्रमाणित घोषणा-पत्र बीआईएस के पास जमा कराना होगा। इस छूट के लिए निर्माताओं के पास या तो बीआईएस प्रमाणन होना चाहिए या उन्होंने इसके लिए आवेदन किया हुआ हो।

सरकार ने निर्यात के उद्देश्य से देश में बनाए जाने वाले उत्पादों को इस आदेश की अनिवार्यताओं से छूट दी है। ठोस, तरल या गैसीय सामग्री से पहले से भरे हुए आयातित कंटेनरों को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है। एक अलग छूट के तहत कुकवेयर, बर्तन और पेय पदार्थों के केन निर्माताओं को अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए सालाना 200 वस्तुओं तक आयात करने की अनुमति दी गई है। इन उत्पादों को हालांकि व्यावसायिक रूप से बेचा नहीं जा सकेगा और इन्हें कबाड़ के रूप में नष्ट करना होगा।

इस छूट का लाभ उठाने वाले निर्माताओं को आयातित वस्तुओं का वर्षवार रिकॉर्ड रखना होगा और उसे केंद्र सरकार के समक्ष जमा करना होगा। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बीआईएस के अधिसूचित किए जाने वाले आगामी संशोधनों सहित संबंधित भारतीय मानकों के नवीनतम संस्करण, उनके अधिसूचित होने की तिथि से ही लागू होंगे।

बीआईएस ही प्रमाणन और प्रवर्तन अधिकारी के रूप में कार्य करेगा। नियमों के उल्लंघन पर बीआईएस अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव सुमीत कुमार जरंगल द्वारा जारी यह आदेश आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही लागू हो गया है।

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