नवभारत पड़ताल : मध्यप्रदेश में हर चौथे ग्रामीण परिवार तक नहीं पहुंचा नल का पानी, देखिए

भोपाल। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचाने की योजना पर काम जारी है, लेकिन कई इलाकों में अधूरे निर्माण, नियमित जलापूर्ति की शिकायतें और योजनाओं के हस्तांतरण में देरी जैसे मुद्दे सामने आए हैं। नवभारत की पड़ताल में मालवा-निमाड़ से लेकर विंध्य और भोपाल-जबलपुर संभाग तक योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।
प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार अब भी नल कनेक्शन से वंचित
6 अक्टूबर 2026 के सरकारी डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 1 करोड़ 11 लाख 5 हजार ग्रामीण परिवारों में से 83 लाख 61 हजार परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचने की जानकारी थी। यह करीब 75.3 प्रतिशत कवरेज है। इसके अनुसार, 27 लाख 44 हजार परिवारों तक कनेक्शन पहुंचना बाकी था।
वहीं, 10 अक्टूबर की एक अलग रिपोर्ट में करीब 86 लाख कनेक्शन दिए जाने और लगभग 28 हजार योजनाओं में से 12 हजार योजनाओं के अधूरे होने का उल्लेख किया गया। दोनों रिपोर्टों के आंकड़े अलग हैं, इसलिए उन्हें संबंधित रिपोर्ट की तारीख के संदर्भ में देखना जरूरी है।
मालवा-निमाड़ में जलापूर्ति को लेकर शिकायतें
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में भी योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, झाबुआ में जल जीवन मिशन के तहत करीब 430 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कुछ गांवों से पानी की समस्या की शिकायतें सामने आई हैं।
शाजापुर जिले के बज्जाहेड़ा में टंकियां और पाइपलाइन बनने के बाद भी पानी नहीं मिलने की शिकायत दर्ज की गई। वहीं, देवास जिले के मेंडकी धाकड़ में बिजली कनेक्शन कटने के बाद जलापूर्ति रुकने की जानकारी सामने आई। इन मामलों में नियमित और भरोसेमंद जलापूर्ति सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
विंध्य में कनेक्शन और टंकियों के निर्माण की स्थिति
विंध्य क्षेत्र के सतना जिले में 2 लाख 37 हजार परिवारों को कनेक्शन देने का लक्ष्य बताया गया है। इनमें से करीब 1 लाख 3 हजार परिवारों तक कनेक्शन पहुंचने की जानकारी है, जबकि लगभग 1 लाख 34 हजार परिवारों तक कनेक्शन पहुंचना बाकी बताया गया।
सीधी जिले में 341 टंकियों में से 229 के निर्माण की जानकारी दी गई है। हालांकि, कई टंकियों के चालू नहीं होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सिंगरौली में 184 टंकियों में से 51 के निर्माण की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इन आंकड़ों से निर्माण के साथ-साथ योजनाओं को चालू करने और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत सामने आती है।
भोपाल जिले में खर्च और जलापूर्ति पर सवाल
भोपाल जिले में जल जीवन मिशन के तहत करीब 313 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित पानी नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।
फंदा और बैरसिया जनपद क्षेत्रों के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 97,642 ग्रामीण परिवारों में से 81,533 परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचे थे, जबकि 16,109 परिवारों तक कनेक्शन पहुंचना बाकी था।
जनपद पंचायत फंदा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवानी मिश्रा के मुताबिक, अभी तक किसी भी योजना का औपचारिक हस्तांतरण नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि कुछ काम करीब 80 प्रतिशत तक पूरे हुए हैं। साझा की गई रिपोर्ट में 15 और 16 अक्टूबर को काम पूरा करने तथा हैंडओवर की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात का भी उल्लेख है।
जबलपुर संभाग में हैंडओवर की चुनौती
जबलपुर संभाग में 608 योजनाओं के तहत 407 गांवों में काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, करीब 150 गांवों की पंचायतों ने योजनाओं का हैंडओवर नहीं लिया। इससे स्पष्ट होता है कि निर्माण पूरा होने के बाद भी योजनाओं को पंचायतों को सौंपने और उनके संचालन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की निष्पादन ऑडिट रिपोर्ट में भी योजना के कार्यान्वयन से जुड़ी कमियों की समीक्षा की गई है।
नल कनेक्शन के साथ नियमित पानी की आपूर्ति भी जरूरी
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचाना है। ऐसे में केवल कनेक्शन या टंकी का निर्माण ही पर्याप्त नहीं, बल्कि नियमित जलापूर्ति, अधूरे कार्यों को पूरा करना और योजनाओं का उचित हस्तांतरण भी अहम है।
मध्य प्रदेश में सामने आए आंकड़े और स्थानीय शिकायतें इस बात की जरूरत रेखांकित करती हैं कि योजनाओं की प्रगति के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण परिवारों को वास्तव में नियमित और पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं। अब बड़ा सवाल यही है कि अधूरे कार्य कब पूरे होंगे और जलापूर्ति की शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेही कैसे तय की जाएगी?

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