इंदौर: एरोड्रम थाने में पुजारी और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष के साथ कथित मारपीट के मामले में टीआई सहित पांच पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद पुलिस महकमे में नाराजगी की स्थिति है. कार्रवाई को लेकर पुलिसकर्मियों से जुड़े पक्ष सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अगले दिन रात में वाहन चेकिंग के दौरान भी सख्ती कम रहने की बात सामने आई है. मामले की जांच एसीपी को सौंपी गई है. वे संबंधित पक्षों के बयान लेने के साथ उपलब्ध फुटेज और शिकायत के तथ्यों के आधार पर पुलिस की भूमिका की जांच करेंगे.
इस मामले में विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक पुजारी जयदीप दुबे और उनके जीजा भाजपा मंडल उपाध्यक्ष पंकज चौबे की शिकायत के बाद कार्रवाई हुई थी. गाड़ी टकराने के बाद पड़ोसियों से हुए विवाद के चलते दोनों एरोड्रम थाने पहुंचे थे. आरोप है कि वहां उनकी सुनवाई नहीं हुई और उनके साथ मारपीट की गई. थाने का एक फुटेज भी सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी पुजारी का पैर पकड़कर खींचता दिखाई दे रहा है. इसके बाद थाने में हंगामा हुआ और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद थाना प्रभारी देवेंद्रसिंह कुशवाह को लाईन अटेच और पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था.
कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों से जुड़े पक्ष का कहना है कि विवाद की शुरुआत मामूली घटना से हुई थी और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी को बड़ा मुद्दा बना दिया. उनका यह भी तर्क है कि सामने आए फुटेज में मारपीट स्पष्ट नहीं है. हालांकि, फुटेज में दिख रहे घटनाक्रम और शिकायत से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. एसीपी अशोकसिंह जादौन संबंधित पुलिसकर्मियों और शिकायतकर्ताओं के बयान लेकर यह पता लगाएंगे कि थाने में क्या हुआ था और पुलिस की ओर से कोई अनुचित व्यवहार किया गया या नहीं.
एसीपी की जांच को माना जा रहा अहम
अब इस पूरे मामले में एसीपी की जांच अहम मानी जा रही है. जांच में थाने के फुटेज, शिकायत और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर पुलिसकर्मियों की भूमिका स्पष्ट होगी. वहीं, चेकिंग में ढिलाई के आरोपों की पुष्टि होने पर यह भी सवाल उठेगा कि निलंबन की कार्रवाई का असर नियमित पुलिसिंग पर किस तरह पड़ा.
