जबलपुर: हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध कथित अपमानजनक टिप्पणियों और जगतगुरु सुखाचार्य स्वामी राघवदेवाचार्य को धमकी देने के मामले में पुलिस की कार्रवाई में देरी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को अगली सुनवाई पर संपूर्ण केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि 11 अप्रैल 2025 को इंटरनेट मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में कथित अपमानजनक पोस्ट किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने संत होने के नाते संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उन्हें कथित रूप से जान से मारने और सिर धड़ से अलग करने की धमकियां दी गईं। आरोप है कि वाट्सएप और फेसबुक पर अपमानजनक पोस्ट भी प्रसारित की गईं। इस संबंध में मदनमहल थाने में 11 अप्रैल 2025 को अपराध दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार मामले में करीब 20 लोगों को आरोपित किया गया था।
इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद शेष आरोपितों के विरुद्ध न तो प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप भी याचिका में लगाया गया है। इसके साथ ही याचिका में उल्लेख किया गया कि 28 सितंबर 2026 को याचिकाकर्ता के निवास पर हमले का प्रयास किया गया, जिसकी सूचना मदनमहल थाने में दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि लगातार शिकायतों और कार्रवाई की मांग के बावजूद अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने के कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने मामले में केस डायरी तलब कर अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
