वॉशिंगटन/द हेग, (वार्ता) अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) पर प्रतिबंध लगा दिया हैं।
अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अदालत के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि वह इसे अमेरिकियों पर मामला चलाने की इजाज़त नहीं देगा।
श्री रुबियो ने घोषणा से पहले एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी भी आईसीसी को अमेरिकियों पर मामले चलाने की इजाज़त नहीं देंगे।” उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद अदालत के संसाधनों को काटना और उसके काम करने की क्षमता को कमज़ोर करना है।
आईसीसी की उप अभियोजक नज़हत शमीम खान ने प्रतिबंध की आलोचना करते हुए कहा कि इनका मकसद अंतराष्ट्रीय कानून और एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था के काम को कमज़ोर करना है।
उन्होंने कहा, “हमारा काम हमारी सभी परिस्थितियों , हमारी जांच और हमारे अभियोजन में जारी रहेगा।” अदालत ने इन पाबंदियों को अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की नींव पर हमला बताया और चेतावनी दी कि “इतिहास इस पल का फैसला करेगा”।
उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद उसके स्टाफ को डराना और उसके काम में रुकावट डालना है, लेकिन उसने हार न मानने का वादा किया।
आईसीसी ने अपने 125 सदस्य देशों से संस्था का बचाव करने की भी अपील की और कहा कि इसका भविष्य कुछ हद तक उन देशों के हाथों में है जिन्होंने इसे बनाया है।
कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, नीदरलैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने पाबंदियों को बढ़ाने की अमेरिका की योजना की घोषणा के बाद एक संयुक्त बयान में आईसीसी के लिए अपने समर्थन की फिर से पुष्टि की।
मंत्रियों ने कहा, “अगर ये प्रतिबंध लागू होते हैं, तो अदालत के काम, उसके समर्पित स्टाफ और उनके परिवारों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि आईसीसी के कर्मचारियों ने सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाने और पीड़ितों की मदद करने के लिए काम किया।
