नई दिल्ली, भारतीय कॉरपोरेट जगत (India Inc) के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2) मुनाफे और कमाई के लिहाज से बेहद शानदार साबित होने जा रही है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग और उत्पादों की कीमतों में आई तेजी के दम पर इस तिमाही में कॉरपोरेट रेवेन्यू में 16% से 16.5% की मजबूत सालाना बढ़त दर्ज होने का अनुमान है। क्रिसिल का यह विश्लेषण बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑयल-गैस सेक्टर को छोड़कर देश के 65 से अधिक सेक्टर्स की करीब 8,000 कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों और कामकाज के गहन अध्ययन पर आधारित है।
ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर्स ने मारी बाजी, कंपनियों ने लागत का बोझ खुद संभालकर फेस्टिव सीजन की मांग को बनाए रखा
रिपोर्ट के मुताबिक, रेवेन्यू में दमदार तेजी के बावजूद कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन लगभग 18.2% से 18.6% के दायरे में स्थिर रहा है, क्योंकि कच्चे तेल और एनर्जी की बढ़ती लागत का पूरा बोझ कंपनियों ने ग्राहकों पर नहीं डाला ताकि त्योहारों के सीजन में बिक्री प्रभावित न हो। इस तिमाही में ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे बड़ा स्टार बनकर उभरा, जहां पैसेंजर व्हीकल्स के रेवेन्यू में 24% और कमर्शियल व्हीकल्स में 21% की भारी ग्रोथ दर्ज की गई। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों का फायदा उठाते हुए मेटल सेक्टर (एल्युमीनियम 26%, स्टील 12%) और पावर सेक्टर (23% उछाल) ने भी शानदार प्रदर्शन किया है।
शहरी बाजारों में चमक लेकिन ग्रामीण इलाकों में बनी रही सुस्ती, एफएमसीजी और आईटी सेक्टर का प्रदर्शन भी रहा बेहतर
क्रिसिल की रिपोर्ट बाजार के भीतर एक असमानता की ओर भी इशारा करती है, जहां शहरों में कारों और प्रीमियम सामानों की मांग तेज रही, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े टू-व्हीलर (महज 12% ग्रोथ) और ट्रैक्टर सेक्टर्स में सुस्ती देखने को मिली। इसके बावजूद रोजमर्रा के सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों का रेवेन्यू 10.5% बढ़ा, जिन्होंने ‘श्रिंकफ्लेशन’ यानी पैकेट का साइज छोटा करने की नीति अपनाकर इनपुट कॉस्ट का मुकाबला किया। वहीं, आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में रुपये की कमजोरी के कारण 12% की बढ़त और टेलीकॉम सेक्टर में 10% का उछाल दर्ज किया गया, जिससे यह साफ है कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों ने अपनी विकास गति को मजबूती से थामे रखा है।

