पुणे, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। पुणे के एस.एम. जोशी ब्रिज पर पिछले पांच दिनों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सीजेपी (CJP) नेता अभिजीत दीपके ने रविवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और कहा कि वे 10 तारीख से चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी राज्यव्यापी प्रोटेस्ट की शुरुआत करेंगे। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे एमपीएससी चेयरमैन के खिलाफ अपना संघर्ष तब तक जारी रखें जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।
सत्ता में बैठे लोगों की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर ‘फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स’ के लगाए आरोप
छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने राज्य सरकार और राजनीतिक व्यवस्था पर बेहद तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि आज देश की यह दुर्दशा इसलिए है क्योंकि अक्सर सत्ता में बैठे लोगों के पास सही और योग्य डिग्रियां नहीं होतीं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने एक करीबी मित्र को एमपीएससी का चेयरमैन नियुक्त किया है, जिसे उन्होंने ‘फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स’ करार दिया जिसका सीधा मतलब भ्रष्टाचार से है। दीपके ने गुस्से में कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात ऐसे हो गए हैं जैसे ‘पैसे फेंको और तमाशा देखो’, जहां विधायकों और राजनीतिक वफादारियों की खरीद-फरोख्त का माहौल बन चुका है।
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के अधिकारों की दिलाई याद, राजनीतिक हालात और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े संघर्ष की जरूरत पर दिया जोर
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि देश के संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने नागरिकों को जो बहुमूल्य अधिकार दिए हैं, वे हमें बहुत आसानी से मिल गए, जिसके कारण लोग उनकी वास्तविक कीमत नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमने अपने अधिकारों के लिए कड़ी लड़ाई लड़ी होती, तो हमें वोट देने के अधिकार और अन्य संवैधानिक अधिकारों का असली महत्व समझ में आता। राज्य की कंपनियों और उद्योगों के बाहर जाने के मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने तंज कसा कि यदि सरकार से व्यवस्था नहीं संभल रही है तो उन्हें खुद ही दूसरे राज्यों का रुख कर लेना चाहिए। इस आंदोलन के और अधिक उग्र होने की संभावना से राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

