
सिंगरौली । एनसीएल की जयंत परियोजना क्षेत्र में हो रही ब्लास्टिंग को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खदानों के आसपास सुरक्षा मानकों के अनुरूप बैरिगेटिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और ब्लास्टिंग से पहले प्रभावी चेतावनी व्यवस्था नहीं है।
आलम यह है कि खदान के मुहाने के आसपास छोटे बच्चे तक खेलते दिखना आम हो गया है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की आशंका से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। शनिवार को जयंत परियोजना क्षेत्र में हुई ब्लास्टिंग के दौरान मलबा और पत्थर खदान से सटे घरों तक जा पहुंचे। वार्ड क्रमांक 10 निवासी बसंत लाल बियार के घर पर कोयले एवं पत्थरों की बारिश होने से अफरा-तफरी मच गई। घटना में उनकी पत्नी जगामती बियार समेत सोनाली बियार और मंजू बियार को चोटें आईं। परिजनों के मुताबिक परिवार में करीब 20 सदस्य हैं। ब्लास्टिंग के समय कुछ लोग घर में काम कर रहे थे, जबकि कुछ आराम कर रहे थे।
500 मीटर डेंजर जोन में सुरक्षा कौन करेगा
डीजीएमएस के प्रावधानों के अनुसार ओपनकास्ट खदान में ब्लास्टिंग स्थल के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को डेंजर जोन माना जाता है। इस पूरे क्षेत्र में ब्लास्टिंग से पहले पर्याप्त चेतावनी देना और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वहां मौजूद लोग सुरक्षित आश्रय में चले जाएं। सार्वजनिक सड़क या रेलवे लाइन डेंजर जोन में आने पर यातायात रोकने और लोगों को चेतावनी देने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था का भी प्रावधान है। डीजीएमएस के तकनीकी दिशा-निर्देशों में भी ब्लास्टिंग के दौरान उड़कर आने वाले पत्थरों और मलबे यानी फ्लाईरॉक को गंभीर खतरा माना गया है। ऐसे में जयंत परियोजना क्षेत्र में यदि आबादी वाले हिस्से ब्लास्टिंग स्थल के प्रभाव क्षेत्र में हैं, तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा, ब्लास्टिंग से पहले चेतावनी, क्षेत्र को खाली कराना और पर्याप्त सुरक्षा घेरा बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
